नर्रा| नर्रा में शाकंभरी जयंती पर सोमवार को जोंक नदी के ऊपर स्थित शाकंभरी मंदिर प्रांगण से माता शाकंभरी भजन करते कलश यात्रा निकालकर ग्राम भ्रमण किया गया। भ्रमण के बाद वापस मंदिर मे विधिवत पं. मोतीलाल तिवारी ने पूजन-हवन यज्ञ करवाया गया। तत्पश्चात भंडारा महाप्रसादी का किया गया। इस अवसर पर मोतीलाल तिवारी ने देवी कथा के अनुसार माता शाकंभरी देवी की महिमा वर्णन किया गया शाकंभरी देवी अन्न, फल, फुल, वनस्पति की देवी भोजन और भरण पोषण का प्रदान करती है। जीवों और सुखी हुई वनस्पतियों को पुनर्जीवित करने के लिए शाकंभरी देवी हिमालय के शिवालिका पर्वत श्रृंखला मे प्रकट हुई थी। शाकंभरी नवरात्र पौष शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर पौष पूर्णिमा आठ दिन तक मनाया जाता है। शाकंभरी माता अन्नपूर्णा का ही रूप है। देवी पुराण के अनुसार शाकंभरी शताक्षी व दुर्गा एक ही देवी का नाम है। इस मौके पर नवीन पटेल, गोपाल किशन पटेल, प्रवेन्द्र दिवाकर व अन्य मौजूद थे।


