नर्मदापुरम में महिला शिक्षिका से स्कूल में जातिगत भेदभाव:जांच समिति ने आरोप सही पाए, शिकायत के 4 महीने बाद केवल नोटिस

नर्मदापुरम जिले के शोभापुर स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक महिला शिक्षिका के साथ जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना का मामला सामने आया है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बावजूद आरोपी प्राचार्य निलेश सोनी अपने पद पर बने हुए हैं, जिससे अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की पीड़ित शिक्षिका डर के साये में नौकरी करने को मजबूर हैं। शिकायत के 4 महीने बाद अब नर्मदापुरम कमिश्नर केजी तिवारी ने प्राचार्य को नोटिस जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव पर जवाब मांगा है। उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखना होगा, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। अलग बैठाने और हस्ताक्षर न करने देने के आरोप
स्कूल की उच्च पद प्रभार शिक्षिका रेखा मेहरा ने 15 सितंबर 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि प्राचार्य निलेश सोनी उनके अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग का होने के कारण उनसे भेदभाव और अभद्र व्यवहार करते हैं। उन्हें स्टाफ रूम में दूसरे कक्ष में अलग बैठाया जाता है और उपस्थिति पंजी (रजिस्टर) पर हस्ताक्षर करने से रोका जाता है। बिना किसी गलती के उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए जाते हैं और जवाब देने पर पावती (रसीद) तक नहीं दी जाती। जांच समिति ने आरोपों को सही पाया
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए डीईओ ने जांच के लिए एक समिति गठित की थी। जांच दल में माखननगर बीईओ सुषमा पिपरे, शासकीय कन्या उमावि सोहागपुर की प्राचार्य सुनीता गढ़वाल और शासकीय हाईस्कूल प्राचार्य यशवंत यदुवंशी शामिल थे। टीम ने स्कूल पहुंचकर जांच की और स्टाफ के लिखित बयान लिए। जांच में सामने आया कि, जांच समिति ने अपने अभिमत में स्पष्ट किया कि शिक्षिका द्वारा की गई शिकायत और तथ्य सही पाए गए हैं। सदाचरण नियमों का उल्लंघन, कार्रवाई की तैयारी
कमिश्नर तिवारी ने जारी नोटिस में लिखा है कि प्राचार्य का यह कृत्य मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 (1) (2) (3) के विपरीत है और कदाचरण की श्रेणी में आता है। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न उक्त कृत्य के लिए उनके विरुद्ध मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। प्राचार्य बोले- आरोप निराधार हैं
दूसरी ओर, कन्या स्कूल के प्राचार्य निलेश सोनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि आरोप निराधार हैं। वे स्कूल में किसी भी शिक्षक-शिक्षिका से भेदभाव नहीं करते और न ही किसी को अलग बैठाते हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो महीने से सभी स्टाफ सदस्य एक साथ ही बैठ रहे हैं।

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