मनेंद्रगढ़ में तहसीलदार श्रुति ध्रुवे के खिलाफ अधिवक्ताओं और पक्षकारों ने देर रात तक धरना दिया। अधिवक्ताओं ने तहसीलदार पर दुर्व्यवहार और मनमानी कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मामूली धाराओं के मामले में मुचलका भरवाए जाने के बावजूद एक आरोपी को जेल भेज दिया गया। इस फैसले के विरोध में अधिवक्ता समुदाय में रोष फैल गया। महिला अधिवक्ता और आरोपी के परिजन देर रात तक तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे रहे। अधिवक्ता संघ की सलाह के बाद यह धरना समाप्त किया गया। अधिवक्ताओं ने घोषणा की है कि वे तहसीलदार श्रुति ध्रुवे के खिलाफ अधिवक्ता संघ में लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। जेल भेजने का फैसला न्यायालय का अधिकार इस मामले पर मनेंद्रगढ़ तहसीलदार श्रुति ध्रुवे ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि आरोपी को जेल भेजना या छोड़ना न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, इस मामले में प्रथम दृष्टया ही आरोपी को जेल भेजने का निर्णय लिया गया था। ऑर्डर शीट में नाम छूटने पर दी सफाई तहसीलदार ध्रुवे ने स्पष्ट किया कि महिला अधिवक्ता संध्या सिंह की ओर से भरे गए मुचलके के आधार पर ऑर्डर शीट में उनका नाम छूट गया था। अधिवक्ता के कहने पर बाद में उनका नाम अंकित कर दिया गया। इसके बाद आरोपी को रिहा करने और जेल न भेजने की मांग की जा रही थी।


