आत्महत्या का मामला:आखिरी खत; सबसे ज्यादा खुश बचपन में थी या नींद में, इसलिए नींद में जा रही हूं

मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी) गर्ल्स हॉस्टल की छठी मंजिल से कूदी छात्रा दिव्याराज की रविवार देर रात मौत हो गई। छात्रा के पास माता-पिता और बहन के नाम 16 लाइन का एक पत्र (सुसाइड नोट) मिला। इसमें लिखा है कि गलती मेरी है, सबसे ज्यादा खुश बचपन में थी या नींद में, इसलिए नींद में जा रही हूं। उदयपुर से नर्सिंग कर रही बहन निशा ने हॉस्टल में रैगिंग होने का आरोप लगाया है। निशा का कहना है कि दिव्या को बहुत परेशान किया गया और रैगिंग की गई, जो उसकी मौत का कारण बन गई, लेकिन कॉलेज प्रशासन नाम खराब होने के डर से रैगिंग की बात नहीं कबूलेगा। छह मंजिला हॉस्टल में सिर्फ 2 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन वो भी बंद थे। परिजनों ने सुसाइड नोट पर संदेह जताया है। पाली के नारलाई निवासी पूर्व सरपंच पिता खंगाराम मेघवाल ने बताया कि पत्नी हीरा देवी सरकारी स्कूल में हिंदी पढ़ाती है। दिव्या हिंदी में बहुत अच्छी थी और सुसाइड नोट में गलतियां हैं, जो वह नहीं कर सकती। राइटिंग भी उसकी नहीं लग रही। वह जब भी पत्र लिखती थी तो अंत में हस्ताक्षर करती थी। यह तो उसने जिंदगी का आखिरी पत्र लिखा है, जिसमें उसके हस्ताक्षर नहीं है। गौरतलब है कि रविवार रात आर्किटेक्चर प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्याराज (21) पुत्री खंगाराम मेघवाल निवासी देसूरी पाली एमएनआईटी हॉस्टल की छठी मंजिल से कूद गई थी। उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव सुपुर्द कर दिया गया। थानाधिकारी संग्राम सिंह ने बताया कि एमएनआईटी प्रबंधन और परिजनों की सूचना पर मृग रिपोर्ट दर्ज की है। एफएसएल की प्रारंभिक जांच में आया कि छात्रा पैरों के बल गिरी। इस कारण ज्यादा खून नहीं निकला। हमारी एक गलती प​रिवार को दे जाती है जीवनभर के आंसू परिजनों ने लगाए आरोप सुसाइड नोट…निशा माफ कर देना…मम्मी-पापा अपना ख्याल रखना सुसाइड नोट में लिखा है कि गलती मेरी ही है, मैं ही इस दुनिया में नहीं जी सकती। लोग है यहां मेरी बातें सुनने को, मैं बता ही नहीं सकती। सबसे ज्यादा खुश मैं या तो बचपन में थी या नींद में। अब बचपन तो वापस आ नहीं सकता तो मैं हमेशा की नींद में जा रही हूं। मौत के बाद क्या होता है नहीं पता, पर शायद शांति तो होती ही होगी। आज अपनी जिंदगी का सौदा उस शायद के नाम। निशा हो सके तो माफ कर देना। मम्मी-पापा और निशा एक-दूसरे का ख्याल रखना। निशा का ख्याल रखना। सबको सॉरी। MNIT का पत्र भी आया
एमएनआईटी ने सोमवार को संवेदना पत्र जारी किया। इसमें लिखा है कि एमएनआईटी आर्किटेक्चर प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्याराज के असामयिक निधन से दुखी है। एमएनआईटी छात्रों की मानसिक और शारीरिक भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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