छिंदवाड़ा में आबकारी विभाग के कर्मचारियों पर एक युवक को ढाबे से उठाकर मारपीट करने और कंट्रोल रूम में भी पीटने के गंभीर आरोप हैं। पीड़ित युवक प्रहलाद चंद्रवंशी ने दावा किया है कि उससे जबरन सात पेटी शराब रखवाई, इसके बाद उसे आबकारी के कंट्रोल रूम ले जाकर बुरी तरह पीटा गया। घटना के बाद हालात उस वक्त और बिगड़ गए, जब युवक के परिजन और गांव के लोग बड़ी संख्या में कंट्रोल रूम पहुंच गए और विरोध करते हुए युवक को वहां से निकालकर सीधे अस्पताल ले गए। हैरानी की बात यह रही कि विरोध के बावजूद आबकारी कर्मचारियों ने युवक को जाने दिया। मामला अब तूल पकड़ चुका है। कंट्रोल रूम से आरोपी को छुड़ाकर ले गए परिजन
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि 10 से 12 लोग आबकारी आरक्षकों से बातचीत करते हुए युवक को अपने साथ ले जाते हैं। घटना के समय मौके पर महिला स्टाफ समेत 4 से 5 आबकारी आरक्षक मौजूद थे, इसके बावजूद कोई सख्त विरोध या कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों के जवाबों पर उठे सवाल
आबकारी विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले में अजीब दलीलें देते नजर आए। अधिकारियों का कहना है कि मौके पर लोगों की संख्या ज्यादा थी, इसी वजह से यह स्थिति बनी। हालांकि बाद में यह भी कहा गया कि युवक को फिर से पकड़ लिया गया है। मामला मोहखेड़ तहसील के ग्राम पटनिया से जुड़ा
पूरा मामला मोहखेड़ तहसील के ग्राम पटनिया निवासी कन्हैया चंद्रवंशी से जुड़ा बताया जा रहा है। आबकारी विभाग ने उस पर अवैध शराब बिक्री का प्रकरण दर्ज किया था और उसे कंट्रोल रूम में रखा गया था।बताया जा रहा है कि ढाबा चलाने वाले इस युवक को उसके परिजन बड़ी आसानी से आबकारी की हिरासत से छुड़ाकर ले गए। मारपीट करने वाले का पता नहीं
पीड़ित युवक का कहना है कि उसे पहले दो युवकों ने गाड़ी में बैठाकर पीटा और बाद में आबकारी कंट्रोल रूम में भी मारपीट की गई। उसने गब्बर और अमित नाम के युवकों पर आरोप लगाए हैं, जो कथित तौर पर शराब ठेकेदार से जुड़े बताए जा रहे हैं। वहीं आबकारी विभाग मारपीट के आरोपों से इनकार कर रहा है। युवक के शरीर पर चोट के निशान मौजूद हैं, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मारपीट किसने की। मेडिकल कराने की मांग, पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण
पीड़ित के परिजनों ने युवक का मेडिकल परीक्षण कराने और इलाज की मांग की है।उधर आबकारी विभाग ने युवक के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है और धाराएं बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। जानबूझकर छोड़ा गया आरोपी?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोपी आबकारी कंट्रोल रूम में बंद था, तो उसे बाहर क्यों लाया गया?न तो किसी आरक्षक ने उसे पकड़ा और न ही वापस ले जाने की कोशिश की गई। इस पर आबकारी निरीक्षक आकाश मेश्राम का कहना है कि आरोपी को जानबूझकर नहीं छोड़ा गया। कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण स्थिति बिगड़ गई।


