वन भूमि अतिक्रमण…रेंजर पर पैसे लेने का आरोप:कब्जा हटाने पर वनकर्मी-ग्रामीणों में विवाद, अधिकारी बोले- कार्रवाई के कारण ऐसा कहा जा रहा

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में बुधवार को वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच जमकर विवाद हो गया। इस दौरान स्थिति करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण बनी रही। ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। यह भी आरोप है कि वन भूमि पर कब्जा कराने के लिए रेंजर शिवनाथ ठाकुर ने किसी से दो हजार, किसी से पांच हजार तो किसी से दस हजार लिए थे। मौके पर ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए रेंजर से कथित रूप से लिए गए पैसे वापस करने की मांग की। वहीं उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोप निराधार है। कार्रवाई के कारण ऐसा कहा जा रहा है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र में मंगलवार रात वन भूमि पर जेसीबी मशीन से एक अस्थायी निर्माण (मड़ई) किया गया था। जिसका उद्देश्य होटल खोलना बताया जा रहा है। यह निर्माण वनरक्षक के निवास से मात्र लगभग 10 मीटर की दूरी पर किया गया। आज दोपहर करीब 2:30 बजे जब वन विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने मौके पर पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध के दौरान विवाद बढ़ गया और स्थिति उग्र हो गई। ग्रामीणों ने कहा कि रात में जेसीबी से अवैध निर्माण होते समय वन विभाग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों की भीड़ से बढ़ा तनाव उनका यह कहना था कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा था, तो उसी समय जेसीबी मशीन को जब्त क्यों नहीं किया गया। वहीं, घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से हालात नियंत्रित बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। वहीं, ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि यदि ईमानदारी से जांच की जाए तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। डीएफओ आलोक वाजपेयी ने कहा कि कुछ लोगों ने अतिक्रमण किया था। जिन्हें आज हटाया गया है। दबाव बनाने के लिए ऐसा आरोप लगाया जा रहा है। वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच शुक्रवार को जमकर विवाद हो गया। ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगाया है, जबकि वन विभाग ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है। यह घटना करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति में रही। ग्रामीणों का आरोप है कि वन भूमि पर कब्जा कराने के लिए संबंधित रेंजर ने पहले पैसे लिए थे। मौके पर ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए रेंजर शिवनाथ ठाकुर से पैसे वापस करने की मांग की। इस दौरान ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। जानकारी के अनुसार, पंडरी गांव के केंनवारी क्षेत्र में वन भूमि पर बीती रात जेसीबी मशीन से एक अस्थायी निर्माण (मड़ई) किया गया था, जिसका उद्देश्य होटल खोलना था। बताया जा रहा है कि यह निर्माण वनरक्षक के निवास से मात्र 10 मीटर की दूरी पर हुआ था। आज दोपहर करीब 2:30 बजे वन विभाग की टीम जब अतिक्रमण हटाने पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद विवाद ने उग्र रूप ले लिया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब रात में जेसीबी से अवैध निर्माण किया जा रहा था, तब वन विभाग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। स्थानीय लोगों ने यह भी पूछा कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण हो रहा था, तो जेसीबी मशीन को उसी समय जब्त क्यों नहीं किया गया। इन सवालों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद हालात पर नियंत्रण पाया गया। फिलहाल, पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। वन विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि यदि ईमानदारी से जांच की जाए तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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