रायसेन शहर में चल रही श्री रामलीला में बुधवार को अहिरावण वध और मां काली के प्राकट्य की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने भगवान हनुमान और मकरध्वज के युद्ध के साथ-साथ हनुमान और अहिरावण के बीच हुए संघर्ष को भी दर्शाया। लीला के अनुसार, जब भगवान राम और लक्ष्मण रामादल में गहरी नींद में सो रहे थे, तब पाताल लोक के राजा अहिरावण ने छल से विभीषण का रूप धारण किया। उसने चकमा देकर राम और लक्ष्मण का हरण कर लिया और उन्हें पाताल लोक ले गया। पाताल लोक में अहिरावण ने अपने द्वार पर मकरध्वज को तैनात कर दिया, ताकि कोई भी अंदर प्रवेश न कर सके। यहां उसने राम-लक्ष्मण की बलि देने की तैयारी शुरू कर दी। प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की खोज करते हुए हनुमान जी पाताल लोक पहुंचे। द्वार पर उन्होंने मकरध्वज को हटने के लिए कहा, लेकिन मकरध्वज ने उन्हें नहीं पहचाना। तब हनुमान जी ने उसे बताया कि वह उन्हीं का पुत्र है और उन्हें अंदर जाने से रोक रहा है। इसके बाद हनुमान और मकरध्वज के बीच भीषण युद्ध हुआ। अंत में हनुमान जी ने मकरध्वज को पराजित किया और पाताल लोक में प्रवेश कर गए। अंदर अहिरावण राम-लक्ष्मण की बलि देने की तैयारी कर रहा था। जैसे ही उसने तलवार उठाई, मां काली अपने विकराल स्वरूप में प्रकट हुईं और उसे रोक दिया। इसके बाद हनुमान और अहिरावण के बीच युद्ध हुआ। हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर दिया और भगवान राम-लक्ष्मण को अपने कंधों पर लेकर वापस रामादल में ले आए।


