आपकी पहचान से जुड़े सभी अहम दस्तावेज खतरे में हैं। सबसे सुरक्षित आधार व पैन कार्ड, वाहन आरसी, जन्म प्रमाण-पत्र महज 30 से 49 रुपए में वेबसाइट पर बेचे जा रहे हैं। यह सबकुछ महज एक क्लिक में हो रहा, वह भी बिना ओटीपी, बायोमेट्रिक सत्यापन के। भास्कर ने वेबसाइट https://cscprintportal.org.in की पड़ताल की। सामने आया कि यह वेबसाइट आधार, पैन कार्ड और आरसी जैसी जानकारी को बिना सुरक्षा के सार्वजनिक कर रही है। भास्कर रिपोर्टर ने पोर्टल पर 2999 रुपए चुकाकर 100 रुपए में अपने आधार कार्ड का मोबाइल नंबर बदलने का आवेदन किया और 3 दिन में नंबर बदल गए। जबकि आवेदन के लिए बायोमेट्रिक मशीन होना जरूरी है। यह सिर्फ अधिकृत आधार सेंटर पर ही कर सकते हैं। यह पोर्टल 30 रु. में किसी का भी फर्जी आधार कार्ड बना देता है। पोर्टल 4 साल से चल रहा है, लेकिन केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और साइबर एक्सपर्ट इस खतरे को पकड़ने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। पोर्टल को छिपाने के लिए बार-बार यूआरएल बदल दिया जाता है। फ्री में यूजर आईडी – कोई भी व्यक्ति इस पोर्टल पर फ्री में अकाउंट बना सकता है। यूपीआई से ही पेमेंट – दस्तावेज डाउनलोड करने या नकली प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए मामूली चार्ज (30-49 रुपए) लिया जाता है। इन खातों में जा रहा – ये पैसे ‘रतनी देवी मीणा’ नाम के खाते में ट्रांसफर हुए। दूसरी बार में नीरज कुमार मीणा के खाते में। इनकी जांच होनी जरूरी है। आधार से पैन कार्ड, गाड़ी नंबर डालकर वाहन आरसी तक आसानी से डाउनलोड 30 रु. में आधार कार्ड
रिपोर्टर ने इस पोर्टल पर जाकर 30 रुपए देकर आधार कार्ड बनवाया। यह असली जैसा दिखने वाला आधार कार्ड था, इसमें यूआईडीएआई के डिजिटल हस्ताक्षर तक मौजूद थे। बिना OTP पैन कार्ड
पोर्टल पर सिर्फ आधार नंबर डालते ही पैन कार्ड डाउनलोड हो गया। न OTP आया, न ईमेल वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ी, जबकि सरकारी सिस्टम में यह प्रक्रिया नामुमकिन है। गाड़ी नंबर डालते ही RC
गाड़ी नंबर डालते ही वाहन की ऑरिजिनल RC हाथोंहाथ डाउनलोड हो गई। सरकारी पोर्टल डूप्लीकेट आरसी के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं वो भी सत्यापन के बाद। सरकारी सिस्टम की मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं है… पोर्टल सरकारी मिलीभगत से चल रहा है। वेबसाइट का सिस्टम गूगल क्लाउड सर्वर पर होस्ट है। वेबसाइट किसी बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है। वेबसाइट रियल टाइम में आधार कार्ड की जानकारी दे रही है, ऐसा तभी संभव है जब आधार के सरकारी सर्वर तक कनेक्शन हो। वेबसाइट एक अन्य URL से एपीआई के जरिए जुड़ी है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन छिपाया है। पोर्टल की एपीआई सर्विस ले रखी होगी, पता करेंगे
“पोर्टल वाले ने किसी आधार पोर्टल की एपीआई सर्विस में घुसपैठ कर रखी होगी। उस पर कार्रवाई करने के साथ-साथ केंद्र को भी अवगत करवाएंगे।”
-आरएल सोलंकी, निदेशक, ईमित्र तकनीकी शाखा


