हाईकोर्ट ने वकील अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को बताया अवैध:कहा- FIR प्रक्रिया में कई गलतियां, पुलिस नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी

ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के मामले में गिरफ्तार एडवोकेट अनिल मिश्रा को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने एक लाख रुपए के निजी मुचलके और एक लाख रुपए की जमानत राशि पर उन्हें रिहा करने के आदेश दिए। हाई कोर्ट ने इस केस में पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार रात करीब 8 बजे अनिल मिश्रा को उनके तीन अन्य साथियों के साथ केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक और वकील जेल के बाहर मौजूद थे। हालांकि, रिहा होने के बाद अनिल मिश्रा ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। सीधे अपने साथियों के साथ कार से घर के लिए रवाना हो गए। केस से जुड़े जुलूस और अन्य गतिविधियों पर भी रोक
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनिल मिश्रा को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था। एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां पाई गईं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस उन्हें नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी, लेकिन इसके बावजूद गिरफ्तारी की गई। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस प्रकरण से जुड़े जुलूस और अन्य गतिविधियों पर भी रोक लगा दी है। 1 जनवरी की रात हुई थी गिरफ्तारी
अनिल मिश्रा को 1 जनवरी की रात डॉ. अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ग्वालियर साइबर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर अनिल मिश्रा सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद संभावना जताई जा रही है कि मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों को भी निचली अदालत से जमानत मिल सकती है। वहीं, एफआईआर को रद्द कराने के लिए अलग से कानूनी प्रक्रिया अपनाने की तैयारी भी की जा रही है। दलित संगठनों ने किया था विरोध
इस घटना को लेकर ग्वालियर में 2 जनवरी को भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी सहित विभिन्न दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर करीब ढाई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दर्ज एफआईआर को अपर्याप्त बताते हुए मुख्य आरोपी अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की मांग की थी। मामले में हुई मैराथन सुनवाई
अंबेडकर पोस्टर विवाद मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई हुई। सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक चली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता, पीड़ित और राज्य सरकार तीनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इस दौरान जांच एजेंसी (पुलिस) और दोनों पक्षों के आचरण पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। इससे पहले रविवार को भी इस मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच गठित की गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस अहलुवालिया ने एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में पीड़ित को सुनवाई का अधिकार अनिवार्य बताते हुए कहा था कि पीड़ित को याचिका से संबंधित पूरी जानकारी दी जाए। मिश्रा के घर के बाहर आतिशबाजी एडवोकेट अनिल मिश्रा के जेल से बाहर आने के बाद बुधवार रात उनके पटेल नगर स्थित निवास पर समर्थकों ने आतिशबाजी की। इस दौरान समर्थक ‘जय श्रीराम’ का जयकारा लगाते रहे। यह वीडियो उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया में भी अपलोड किया गया है। ……………………………………………………….. ये खबर भी पढ़ें… ग्वालियर में अंबेडकर की तस्वीर जलाने पर ढाई घंटे प्रदर्शन डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने और आपत्तिजनक नारेबाजी के मामले को लेकर ग्वालियर में शुक्रवार को जबरदस्त विरोध देखने को मिला। भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी सहित विभिन्न दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर करीब ढाई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। पूरी खबर पढ़ें

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