झारखंड के गुमला जिले में झांगुर गुट के सरगना रामदेव के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार को भी सर्च ऑपरेशन चलाया। बिशुनपुर थाना क्षेत्र स्थित देवरागानी क्षेत्र के रामदेव के आवास पर भी पुलिस ने तलाशी ली, वहां कुछ भी नहीं मिला। रविवार देर रात सुरक्षाबलों के साथ उसकी मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान वो भागने में सफल रहा, पर पुलिस ने एके-47 राइफल, सेमी ऑटोमेटिक राइफल, कारतूस, एक पिट्ठू और दैनिक उपयोग की कई सामग्री बरामद की। इससे पहले वर्ष 2013 में रामदेव के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चला था, पर तब से वो पुलिस गिरफ्त में कभी नहीं आया। जंगल का फायदा उठा भाग निकला रविवार देर रात एसएसबी-32 बटालियन और कुख्यात झांगुर गुट के बीच मुठभेड़ हुई। देवरागानी जंगल में हुई इस मुठभेड़ में करीब एक घंटे तक दोनों तरफ से गोलीबारी चली। हालांकि, गुट का सरगना रामदेव उरांव एक बार फिर जंगल का फायदा उठाकर फरार होने में कामयाब रहा। रामदेव के गुट में पांच से छह सदस्य हैं रामदेव उरांव क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना हुआ है। बिशुनपुर, चैनपुर और घाघरा इलाके में उसका दहशत है। एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव ने बताया कि इन तीनों थानों में उसके खिलाफ नरसंहार समेत 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस मात्र दो बार ही बार उसके ठिकाने पर सर्च ऑपरेशन चला पाई है। मुठभेड़ के बाद से क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। रामदेव तेंदर व देवरागानी इलाके में बड़े आराम से रह कर रंगदारी की उगाही करता रहा है। रंगदारी से जो पैसा मिलता है, उसे रामदेव लोगों के बीच बांटता है। इस कारण वह उस क्षेत्र में हमदर्द बना हुआ है। रामदेव सुरक्षा की दृष्टिकोण से कभी भी माओवादी व जेजेएमपी से भिड़ने का प्रयास नहीं किया है। क्योंकि वह अपनी ताकत जानता है। उसके पास एक समय 25 से 30 सदस्य थे, जो अब घट कर पांच से छह रह गए हैं।


