‘तुम रशियन हो 6000 में रात भर के लिए चलोगी’:बिहार की लड़की को रोज लड़के देते ऑफर, बोली-मैं लिट्‌टी बेचने आई थी धंधा करने नहीं

‘तुम इतनी गोरी कैसे हो। यह रशियन है। 6 हजार रुपए में चली जाएगी। यह तो बहुत बोल्ड है। एक बार अप्रोच करने पर ही मान जाएगी। हम खाने नहीं इस रशियन को देखने आते हैं। मेरे पास BMW है। चिकन बेचना छोड़ो, मेरे साथ लॉग ड्राइव पर चलो। तुम होटल में जाने का कितना लेती हो। ऐसे कई लोग दुकान में आते हैं, जो खाते कुछ नहीं बस मुझे देखा करते हैं, भद्दे कमेंट करते हैं और ऑफर देते हैं।’ ये कहना है सोनपुर की रशियन जैसी दिखने वाली लड़की का। सोशल मीडिया पर उसकी पोस्ट पर अलग से गंदे कमेंट किए जाते हैं। इससे परेशान होकर सोनपुर की रोजी नेहा सिंह ने अपनी चिकन-लिट्टी की दुकान बंद कर दी। रशियन जैसी दिखने वाली बिहार की लड़की को ग्राहक किस तरह कमेंट करते हैं, इन सबसे वह कैसे बचती है? सोशल मीडिया को कैसे फेस करती है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने उससे बात की? पढ़िए रिपोर्ट सैलरी समय पर नहीं मिलती, नौकरी छोड़ बिजनेस शुरू किया मैं बिहार के सोनपुर की रहने वाली हूं। वहां, मेरी मां, भाई और बहन रहते हैं। पिछले कई सालों से रांची में रह रही हूं। यहां नौकरी कर रही थी। पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हूं। करीब 10 साल से इस फील्ड में काम कर रही हूं। नौकरी से परेशान हो गई थी। सैलरी समय पर नहीं मिलती थी। काफी वक्त तक मालिक पैसे नहीं देता था। इसी वजह से मैंने अपनी एक दोस्त के साथ मिलकर बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। बिजनेस शुरू होने से पहले ही मेरी दोस्त ने धोखा दे दिया। मुझे अकेले ही सब कुछ संभालना पड़ा। अकेली लड़की के लिए दुकान चलाना आसान नहीं मैंने रांची के लालपुर इलाके में न्यूक्लियस मॉल के सामने एक छोटी सी दुकान ली। पॉश इलाका होने से किराया करीब 12 हजार रुपए था। मैं चिकन लिट्टी बनाती थी। मेरी तरह स्वादिष्ट चिकन लिट्टी बनाने वाला कुक नहीं मिल रहा था। इसलिए ज्यादातर काम खुद करती हूं। खरीदारी से लेकर खाना पकाने और बेचने तक। मेरी मां कुछ दिन के लिए रांची आई थीं। खाना पकाने में थोड़ी मदद करती थीं। उनके जाने के बाद पूरी तरह अकेली पड़ गई। आसपास के लोग भी सपोर्टिव नहीं थे। ज्यादातर दुकानें पुरुषों की थीं। मेरी दुकान के बगल में शराब पीने वालों का अड्डा था। लोग चिल्लाकर कहते- ये रशियन, 6000 में चलेगी दुकान खोलने के बाद सबसे ज्यादा जिस बात से तकलीफ हुई, वह है गंदे लोगों की जुबान। सड़क से गुजरते समय कुछ आवारागर्द कहते, ‘ये रशियन, 6000 में चलेगी?’ पहले जब नौकरी करती थी तो सड़क पर चलते हुए ऐसी बातें सुनती थी, लेकिन दुकान खोलने के बाद ये सब खुलेआम होने लगा। लोग दुकान के सामने रुक कर चिल्लाते थे। हंसते थे, मजाक उड़ाते थे। कुछ लोग मेरे शरीर, मेरे कपड़ों और मेरे मेकअप पर भद्दी बातें कहते थे। कोई कहता ‘लिपस्टिक लगाकर यहां लिट्टी बेचने क्यों बैठी है? कोई कहता ये दुकान चलाने के लिए नहीं बनी है।’ मैं मेकअप आर्टिस्ट हूं। यही मेरा प्रोफेशन है। मेरा लुक, बालों का रंग, स्किन, ये सब नेचुरल हैं। यह मेरी पहचान है। बहुत सी महिलाओं को मेरा मेकअप पसंद है। वे मुझसे अपना मेकअप कराने आती हैं। मेरा लुक मेरे लिए यहां सजा बन गया। इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया तो दुकान ज्यादा चली, मुसीबत बढ़ी मैं सोशल मीडिया पर पहले से एक्टिव थी। मेकअप से जुड़े वीडियो बनाती थी। दुकान खोलने के 2-3 दिन बाद मैंने एक साधारण सा वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। बिना माइक, बिना लाइट, बस ऐसे ही। मुझे अंदाजा नहीं था कि वह वीडियो 7 लाख से ज्यादा बार देखा जाएगा। वीडियो वायरल होने के बाद लोग दुकान पर आने लगे। दुकान ज्यादा चलने लगी, लेकिन मुसीबत बढ़ गई। करीब 20-30% लोग खाने के लिए आते, लेकिन 70-80% लोग सिर्फ मुझे देखने, ट्रोल करने और मजाक उड़ाने आते थे। कोई कहता ‘हम खाने नहीं, इसे देखने आते हैं।’ इंस्टाग्राम पर भी मैसेज आने लगे। 300 में चलोगी। 6000 में डील फिक्स। धमकियां मिलने लगीं, लोग पीछा करने लगे कुछ लोग इंस्टाग्राम पर मैसेज करके धमकी देने लगे। कहते थे रात 9 बजे जाएगी तो ऐसे करेंगे, वैसे करेंगे। स्कूटी से घर जाते वक्त लोग पीछा करते थे। रात में नींद नहीं आती थी। सोचती थी, इतनी मेहनत से दुकान खोली, क्या यही देखने के लिए? मैं बिजनेस करना चाहती थी, ‘धंधा’ नहीं सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की थी कि लोग मुझे प्रोस्टीट्यूट की तरह ट्रीट करने लगे। जैसे मैं दुकान नहीं, कोई गलत काम करने बैठी हूं। मैं बिजनेस करना चाहती थी। चिकन लिट्टी की दुकान खोलने के लिए अपने गहने तक बेच दिए। मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं थे। मैंने कभी अपनी तकलीफें सोशल मीडिया पर नहीं दिखाई। मैं भीख नहीं मांगना चाहती थी। सहानुभूति नहीं चाहती थी। बस अपना काम करना चाहती थी। दुकान चली, लेकिन हालात ने बंद करवा दिया दुकान चलने लगी थी। शाम को 6-7kg चिकन बनाती थी। सब बिक जाता था। मुनाफा भी हो रहा था। कई लड़कियां मुझे फोन करती थीं। कहती थीं, दीदी, हम भी दुकान खोलना चाहती हैं। आपने कैसे शुरू किया? लेकिन माहौल इतना जहरीला हो गया कि मुझे दुकान बंद करनी पड़ी। मानसिक रूप से टूट चुकी थी। अब फिर से शुरू करने की तैयारी मैंने हार नहीं मानी है। मैं फिर से दुकान खोलना चाहती हूं, लेकिन इस बार ऐसी जगह जहां अंदर बैठकर काम कर सकूं। जहां स्टाफ होगा, सुरक्षा होगी। अकेले लिट्टी बनाना मुश्किल है। इसलिए चिकन-चावल, मटन-चावल या दूसरी वैराइटी पर सोच रही हूं। मेरे घरवाले कपड़ों की दुकान खोलने की सलाह दे रहे हैं। अब बिजनेस ही करूंगी। फिर से नौकरी नहीं करना चाहती। मैं ये कहानी इसलिए बता रही हूं क्योंकि यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है। यह उन तमाम लड़कियों की कहानी है जो अपने दम पर कुछ करना चाहती हैं। मैं बिजनेस करने चली थी, लोगों ने ‘रशियन’ बना दिया। कौन हैं रोजी नेहा सिंह? रोजी नेहा सिंह मूल रूप से बिहार के सोनपुर की रहने वाली हैं। पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हैं। स्ट्रीट फूड वेंडर के रूप में काम किया है। इस समय रांची में रह रहीं हैं। छपरा के जेपी यूनिवर्सिटी से B.Sc तक पढ़ाई की है। इंटर के समय ब्यूटीशियन का कोर्स किया था। परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए ब्यूटीशियन के रूप में काम किया। खुद के पैरों पर खड़ी होना चाहती हैं।

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