प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था बेहाल है। सरकार ने तबादलों पर रोक लगा रखी है। अगले महीने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं प्रारंभ होगी। संस्था प्रधानों पर परीक्षा की तैयारी का जिम्मा है। बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं प्रारंभ हो गई है। इसके बावजूद चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ना तो बोर्ड परीक्षा की तैयारी आड़े आ रही है और ना ही तबादलों पर लगा प्रतिबंध। एक दिन पहले ही शिक्षा विभाग ने चार अलग-अलग सूचियां जारी कर 412 प्रिंसिपल के तबादले कर दिए। इतना ही नहीं पिछले 3 महीनों में शिक्षा विभाग में 6 हजार से अधिक प्रिंसिपल इधर-उधर हो चुके हैं। प्रदेश में वर्तमान में 12982 प्रिंसिपल कार्यरत है। इसके हिसाब से देखे तो 3 महीने में कार्यरत प्रिंसिपल में करीब 50 फीसदी प्रिंसिपल का तबादला किया गया है। इसमें भी कई प्रिंसिपल ऐसे है जिनका दो से तीन बार तबादला हो चुका है। मंगलवार को जारी सूची में तो ऐसे प्रिंसिपल का भी तबादला कर दिया गया जिन्होंने कोर्ट से स्टे ले रखा था। सीमा चौधरी का तीन महीने में 3 बार तबादला हो चुका है। सीमा चौधरी राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल दुर्जनियावास झोटवाड़ा जयपुर में कार्यरत थी। सबसे पहले यहां से राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल सावरदा मौजमाबाद जयपुर, फिर यहां से राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल पवालिया सांगानेर जयपुर और अब एक दिन पहले जारी सूची में यहां से राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल हनूतिया खुर्द माधोराजपुरा जयपुर में कर दिया गया। सीमा ने बताया मैं एक सैन्य अधिकारी की प|ी हूं। इसके बावजूद बार बार तबादला करके एक तरह से मुझे मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। एक महीना भी नहीं होता कि मेरा तबादला हो जाता है। ऐसे में मैं बच्चों के हित में कैसे काम कर पाऊंगी। मुझे दो बार तो तबादलों से मिलने वाला टीए-डीए भी नहीं दिया गया। प्रिंसिपल को यूं किया चक्कर घिरनी प्रिंसिपल तबादलों की शिकायत पीएम से करेगा शिक्षक संगठन प्रतिबंध के बावजूद लगातार हो रहे प्रिंसिपल तबादलों को लेकर अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) ने प्रधानमंत्री को शिकायत करने की घोषणा की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हो गई। अगले महीने बोर्ड परीक्षा है और फिर स्थानीय परीक्षाएं। स्कूलों मे कोर्स अधूरा पड़ा है। सरकार ने तबादलों पर प्रतिबंध भी लगा रखा है। इसके बावजूद विभाग में इस तरह से तबादले होना समझ से परे हैं। इसलिए इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से की जाएगी और मांग रखी जाएगी कि तबादला नीति बनाकर तबादले ग्रीष्मकालीन अवकाश में ही किए जाएं।


