छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू की गई है। इससे ठीक पहले कुछ अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए। अब इसे लेकर विवाद छिड़ चुका है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बलौदा बाजार के पूर्व कलेक्टर और SP को क्लीन चिट दिए जाने पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने गरियाबंद के ही रहने वाले एक अधिकारी को उसी जिले में चुनावी जिम्मेदारी दिए जाने का मामला उठाया है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गरियाबंद के कलेक्टर रह चुके केएल चौहान और एसपी सदानंद कुमार को लेकर सवाल उठाया है। जून 2024 में जब उग्र भीड़ ने SP और कलेक्टर ऑफिस जला दिया था तब दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था। अब उन्हें IAS अफसर चौहान को बिलासपुर का अपर संभागीय आयुक्त और IPS सदानंद को DIG बना दिया गया है। बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा- एसपी और कलेक्टर को क्लीन चिट देने में सरकार को वक़्त नहीं लगा। लेकिन दर्जनों लोग बिना दोष जेल भेज दिए गए हैं उनके बारे में सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। जो घटना स्थल पर थे लेकिन भाजपा के सदस्य होने के कारण निर्दोष मान लिए गए हैं उन पर भी एक रिपोर्ट आनी चाहिए। दरअसल बलौदा बाजार हिंसा जैतखाम के अपमान के बाद भड़की थी। सतनामी समाज के लोगों ने उग्र प्रदर्शन किया था। इसी मामले में कांग्रेस के विधायक देवेंद्र यादव भी रायपुर की जेल में बंद है। 150 से अधिक प्रदर्शनकारी भी तब से जेलों में हैं। दूसरा विवाद गरियाबंद में एक अफसर को पोस्टिंग दिए जाने पर है। धमतरी में अपर कलेक्टर रहे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी घासी राम मरकाम को जिला पंचायत सीईओ के रूप में पदस्थ किया गया है। वो गरियाबंद के ही रहने वाले हैं। इनकी पोस्टिंग के बाद आचार संहिता लग गई। अब जिला प्रशासन का अधिकारी होने की वजह से मरकमा को चुनावी जिम्मेदारी भी मिलेगी। इस पर कांग्रेस ने सोशल मीडिया में लिखा- गरियाबंद में किसी गहरी प्रशासनिक साजिश की बू आ रही है। अचार संहिता से पहले धमतरी में पदस्थ जिस अपर कलेक्टर को गरियाबंद जिला सीईओ बना के भेजा है गया है, वे उसी जिले के रहने वाले है। वे गरियाबंद तहसील के गांव में रहते है और मैनपुर तहसील में ससुराल है। आगामी चुनाव में वे रिटर्निग अफसर का काम भी करेंगे। भाजपा सरकार बताये ऐसे में निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे ???


