पश्चिमी सिंहभूम जिले में झुंड से बिछड़े जंगली हाथी के आतंक से बुधवार को राहत मिली। 1 जनवरी से लगातार हर रात हादसे के सातवीं रात जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली, जिससे प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। माना जा रहा है कि हाथी को वन विभाग के कर्मियों जंगल में ही घेर रखा है। हाथी अभी भी क्षेत्र में मौजूद वन विभाग की टीमें ड्रोन और ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हाथी अभी भी क्षेत्र में मौजूद है। इसलिए पूरी तरह खतरा टला नहीं है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। क्षेत्र में माइकिंग कर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है। बीते एक सप्ताह के दौरान इस दो दांत वाले हाथी ने कई गांवों में हमले किए थे। इन हमलों में 17 ग्रामीणों की जान चली गई, कई घर क्षतिग्रस्त हुए और खेतों को भी भारी नुकसान पहुंचा। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है। हाथी को बेहोश कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा वन विभाग हाथी को सुरक्षित रूप से पकड़ने और उसे जंगल की ओर वापस भेजने के लिए व्यापक अभियान चला रहा है। डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि झुंड से बिछड़े हाथी को काबू में करने के लिए अब बाहरी राज्यों से भी विशेषज्ञ टीमों को बुलाया गया है। दिन निकलते ही जंगल में छिप जाता है हाथी 1 से 7 जनवरी के बीच हाथी 17 लोगों की जान ले चुका है। अब तक 12 अलग-अलग जगहों पर हमला कर चुका है। इन हमलों का पैटर्न बेहद खतरनाक और साफ है कि हाथी सिर्फ रात में निकलता है और दिन निकलते ही जंगल में छिप जाता है। रात में एक घटना को अंजाम देने के बाद वह रुकता नहीं, बल्कि आगे बढ़ता जाता है। रास्ते में पड़ने वाले वनग्रामों की झोपड़ियां, खलिहान और कुंभा ही उसके मुख्य निशाने बन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवहार संकेत देता है कि हाथी मस्त (मेटिंग) अवस्था में है। इसी कारण वह मानव बस्तियों से डर नहीं रहा और बार-बार एक ही तरह के ठिकानों पर हमला कर रहा है जहां लोग रात में सोते हैं। दिन के उजाले में हाथी का कहीं न दिखना, वन विभाग की ट्रैकिंग को भी मुश्किल बना रहा है। रात में हमले और दिन में जंगल में छिपने की यह रणनीति ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हाथी के हमले रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट पश्चिमी सिंहभूम जिले में लगातार हो रहे हाथी के आक्रमण और उससे हो रहे जान-माल के नुकसान को देखते हुए जिला प्रशासन एवं वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी के निर्देशानुसार चाईबासा और कोल्हान डिवीजन में हाथियों के खतरे से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिले में आरसीसीएफ जमशेदपुर, सीएफ चाईबासा सहित सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी जिला मुख्यालय में कैंप कर स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। दोनों डिवीजन में गठित विशेष टीमों द्वारा प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए सार्वजनिक घोषणा की जा रही है, साथ ही टॉर्च और पटाखों का वितरण भी किया गया है। एक्सपर्ट टीम हाथियों को इंसानी बस्तियों से दूर रखने का कर रही प्रयास किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की तैनाती की गई है। 04 जनवरी से बंगाल से आई एक्सपर्ट टीम हाथियों को इंसानी बस्तियों से दूर रखने और नुकसान कम करने के लिए मौके पर कार्य कर रही है। प्रशासन द्वारा नियमानुसार पीड़ितों को अनुग्रह राशि एवं मुआवजा देने की प्रक्रिया भी जारी है। हाथी के हमलों में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कर बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा PCCF वाइल्ड लाइफ के चाईबासा पहुंचने की सूचना है और WII देहरादून से वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट को भी बुलाया गया है।


