हार्ट अटैक में शुरू के पांच मिनट बेहद जरूरी:CPR से बचाई जा सकती है जान, कोटा में दी जा रही ट्रेनिंग

अचानक हार्ट अटैक से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। सर्दी में ये घटनाएं ज्यादा होती हैं। ऐसे में कोटा में लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग दी जा रही है। कोटा में चिकित्सा विभाग की तरफ से डिस्पेंसरियों में लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि आपात स्थिति में जान बचाई जा सके। चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि हार्ट अटैक या अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में सीपीआर वह पहला और सबसे प्रभावी कदम है, जो मरीज को नई जिंदगी दे सकता है। कोटा के केशवपुरा स्थित डिस्पेंसरी में भी गुरुवार को सीपीआर ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया। इसमें वहां आए हुए मरीजों को इसके बारे में जानकारी दी गई। डमी पर प्रेक्टिकल करके ट्रेनिंग दी गई। डॉ. यावर खान ने बताया- मुख्य चिकित्सा अधिकारी नरेन्द्र नागर के निर्देश पर यह ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जा रहे हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को निशुल्क इसकी ट्रेनिंग मिल सके और फायदा हो। कोटा क्षेत्र के सभी सीएचसी और पीएचसी में कार्यरत डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है। प्रशिक्षित स्टाफ न केवल अस्पताल में बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आसपास के क्षेत्र में भी प्राथमिक सहायता दे सकता है। इसके साथ ही आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए अस्पतालों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी सीपीआर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। क्यों जरूरी है सीपीआर सीपीआर का मतलब है हृदय की कृत्रिम सहायता करना। जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है या सांस रुक जाती है, तब सीपीआर के जरिए छाती पर दबाव देकर रक्त संचार को अस्थायी रूप से चालू रखा जाता है। इससे दिमाग और शरीर के अन्य अंगों तक आक्सीजन पहुंचती रहती है और मरीज को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने का समय मिल जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के बाद पहले तीन से पांच मिनट का समय काफी महत्वपूर्ण होता है। दुनिया भर में सीपीआर को बायस्टैंडर लाइफ सेविंग टेक्नीक कहा जाता है, यानी ऐसा जीवन रक्षक उपाय जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति सीख सकता है। डॉक्टर यावर ने बताया कि सबसे पहले यह देखें कि व्यक्ति प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं। इसके बाद सांस और नाड़ी की जांच की जाती है। यदि कोई प्रतिक्रिया न मिले, तो तुरंत आपातकालीन सेवा को कॉल कर छाती के बीचों-बीच दोनों हाथों से दबाव दिया जाता है। हर मिनट लगभग 100 से 120 बार दबाव देना सबसे प्रभावी माना जाता है। सर्दी में बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। इसके कई कारण है। रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना, सर्दियों में शरीर का तापमान गिरने पर खून गाढ़ा होना, ठंड में ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है क्योंकि दिल को शरीर को गर्म रखने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। सर्दियों में लोग आमतौर पर कम चलते-फिरते हैं, जिससे उनका शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। ठंडे मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

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