85 दिनों बाद खदान से बाहर निकाला शव:ट्रिपर सहित खदान में डूबे थे अनिल,शव पाने पत्नी ने जबलपुर हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका; आज अंतिम संस्कार

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) धनपुरी में कार्यरत अनिल कुशवाहा बंद पड़ी खदान में काम करते समय 11 अक्टूबर 2025 को ट्रिपर सहित पानी से भरी खदान में डूबे गए थे। लगातार उनकी सर्चिंग की गई और आखिरकार 85 दिनों के बाद कर्मचारी अनिल कुशवाहा का शव (कंकाल) निकाला गया। इस दौरान मृतक के परिजन और एसईसीएल के अधिकारी, कर्मचारी भी मौजूद रहे। अनिल की पत्नी आरती कुशवाहा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए अंतिम संस्कार के लिए पति के शव की मांग की थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर बंद पड़ी खदान में भरा करीब 40 फीट गहरे पानी को मशीनों की मदद से निकाला गया। गुरुवार को खदान में ट्रिपर दिखा, जिसके भीतर अनिल कुशवाहा का शव मिला। आज उनके गृह ग्राम मऊगंज में अंतिम संस्कार होगा। ट्रिपर सहित डूबा था कर्मचारी SECL के सोहागपुर एरिया में मऊगंज निवासी अनिल कुशवाहा आरकेटीसी प्राइवेट कंपनी में ठेके पर ट्रिपर चालक का काम करते थे। 11 अक्टूबर 2025 को भारी बारिश के बाद भी उन्हें 15 साल से बंद पड़ी खदान में काम पर भेजा गया, जहां मिट्टी धंसने से वे ट्रिपर सहित गहरे पानी में समा गए। सेना ने चलाया सर्च ऑपरेशन घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ की मदद से शव और ट्रिपर को तलाश करने की कोशिश की, पर पानी अधिक होने के कारण रेस्क्यू नहीं हुआ। प्रशासन ने वाराणसी से NDRF और जबलपुर से सेना की मदद ली। NDRF के 94 जवानों ने सर्च ऑपरेशन चलाया, ट्रिपर 84 फीट की गहराई में दिखाई तो दिया पर पानी अधिक होने के कारण उसे निकाला नहीं जा सका। अत्यधिक गहराई और जोखिम की वजह से रेस्क्यू आगे नहीं किया जा सका। परिवार की सहमति से प्रशासन ने बाद में डेथ सर्टिफिकेट जारी कर 25 लाख रुपए की मुआवजा राशि तय की, जो SECL या ठेका कंपनी द्वारा दी गई। पति का शव पाने और कंपनी की लापरवाही को लेकर अनिल की पत्नी आरती कुशवाहा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि जिस खदान में उनके पति को भेजा गया, वह 15 साल से बंद थी और माइंस एक्ट के तहत उसकी क्लोजर रिपोर्ट बननी चाहिए थी, लेकिन इसके बावजूद भी काम कराया जा रहा था। कोर्ट को बताया कि सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे और कंपनी ने टारगेट पूरा करने के लिए दबाव बनाकर काम करवाया। पति का अंतिम संस्कार करना है अनिल कुशवाहा की पत्नी आरती कुशवाहा ने कोर्ट से कहा कि कंपनी ने आश्वासन दिया था कि 60 दिनों के भीतर शव मिल जाएगा पर आज तक कुछ नहीं हुआ। दिसंबर 2025 के दूसरे सप्ताह में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई तो आरती ने कोर्ट से कहा कि हिंदू रीति-रिवाज से पति का अंतिम संस्कार करना है, कम से कम अवशेष मिल जाएं, उसी का संस्कार कर दिया जाएगा। जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने डीजीएमएस (खनन सुरक्षा महानिदेशालय), शहडोल कलेक्टर, SECL, आरकेटीसी कंपनी और धनपुरी थाने को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा, साथ ही निर्देश दिए कि खदान का पानी खाली कर शव को निकाला जाए। हाईकोर्ट के आदेश पर कंपनी और स्थानीय प्रशासन ने बंद पड़ी खदान में भरा करीब 40 फीट गहरे पानी को निकालना शुरू किया। SECL, आरकेटीसी कंपनी और स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीम के साथ कई बड़ी-बड़ी मशीनें लगातार खदान में भरा पानी निकालती रही। लाखों गैलन पानी जब खदान से निकाला गया, तब जाकर ट्रिपर दिखाई दिया, जिसमें की अनिल की बाॅडी फंसी हुई थी। एसडीआरएफ की टीम ने बमुश्किल ट्रिपर में फंसे अनिल कुशवाहा के क्षत-विक्षत शव को निकालकर परिजनों को सौंप दिया। ये खबर भी पढ़िए… 58 दिन से पति की लाश मांग रही पत्नी…NDRF-सेना नाकाम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की खदान में डूबे कर्मचारी अनिल कुशवाहा की पत्नी आरती कुशवाहा ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने पति के अंतिम संस्कार के लिए शव दिलाने की मांग के साथ हादसे के लिए जिम्मेदार सुपरवाइजर और सुरक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई की गुहार लगाई है। पढ़ें पूरी खबर…

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