नरसिंहपुर जिले के करेली वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्वारीकलां बीट में तेंदुए के शिकार के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरसिंहपुर की अदालत ने इन सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह घटना 3 जनवरी को हुई थी, जब ग्वारीकलां बीट में क्लच वायर के तार का फंदा बनाकर एक तेंदुए का शिकार किया गया था। वन विभाग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए खापा तहसील करेली निवासी चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में नारायण पिता नन्हेंवीर ठाकुर (65 वर्ष), दुर्गाप्रसाद पिता उद्दालाल ठाकुर (55 वर्ष), रामभवन पिता अढ़ाईलाल ठाकुर (35 वर्ष) और भवानी पिता चिंतामन ठाकुर (60 वर्ष) शामिल हैं। ये सभी आरोपी थाना कोतवाली नरसिंहपुर क्षेत्र के निवासी हैं। उनके खिलाफ भारतीय वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 51(अ) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। गुरुवार को आरोपियों की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरसिंहपुर के न्यायालय में जमानत याचिका प्रस्तुत की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीपीओ अमित कुमार राय ने विशेष पैरवी की, जबकि विवेचना अधिकारी वनपाल सुरेंद्र सिंह राजपूत ने प्रकरण से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता, वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों और प्रस्तुत साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए चारों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। वन विभाग के अनुसार, घटना के तुरंत बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने क्लच वायर के तार का फंदा बनाकर तेंदुए के शिकार की बात स्वीकार की है। मामले में आवश्यक साक्ष्य, जब्ती और पंचनामा की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है। वन मंडल नरसिंहपुर के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्य प्राणियों के शिकार जैसे गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नरमी नहीं बरती जाएगी। इस प्रकरण में आगे की विवेचना जारी है और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


