जयपुर की रहने वाली एक्ट्रेस रिचा मीणा ने अपनी एक्टिंग से दुनिया में एक अलग पहचान बनाई है। रिचा की फिल्म की स्क्रिनिंग जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (JIFF) में हुई। इस दौरान अपने सफर और संघर्ष की कहानी साझा की। समाज और परिवार की उम्मीदों से अलग जाकर रिचा ने अपने संघर्ष और मेहनत से खुद की एक मजबूत पहचान बनाई। एक्टिंग करने के लिए उन्होंने अपने परिवार तक से लड़ाई लड़ी। परिवार ने भी हर जगह रिचा का हौसला तोड़ा, यहां तक की सेट पर रिचा की पिटाई तक कर दी थी। इसके बाद भी वे बॉलीवुड में काम कर रही हैं। ऋचा ने रनिंग शादी, डैडी, मर्दानी 2, कसाई, ऑस्कर नॉमिनेटेड ‘छेल्लो शो’ (लास्ट फिल्म शो), डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘सीक्रेट्स ऑफ ताज महल’ में काम किया हुआ है। इस डॉक्यूमेंट्री को ‘एमी अवॉर्ड’ के लिए नॉमिनेट किया गया था। आगे पढ़िए रिचा का पूरा इंटरव्यू… सवाल: कैसा लग रहा है अपने शहर आकर, किस तरह की जर्नी रही है? रिचा मीणा: मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अपने शहर में अपनी फिल्म के साथ आई हूं। जिफ में हमारी फिल्म रूबरू की स्क्रीनिंग हुई है। बहुत प्यार मिल रहा है। अपनी जर्नी की बात करूं तो ऐसी जगह और कम्यूनिटी से आती हूं, जहां एक्टिंग से कोई वास्ता नहीं होता है। हमारे यहां बहुत ही टीपिकल एक्स्पेक्टेशंस होती है। बोला जाता है आप पढ़ाई करें। आप एक गवर्नमेंट जॉब की तैयारी करें। बैंक में लग जाएं या टीचर लग जाएं। कुछ नहीं तो आप शादी कर लें। जब मैंने बताया- मैं एक्टिंग करने वाली हूं। तरह-तरह की बातें बनने लग गईं। सब बोलने लग गए कि यह तो पागल हो गई। तुम तो लड़की हो, तुम्हारे लिए वहां कुछ सही नहीं है। किसी ने भी विश्वास नहीं किया। बोलते थे हम लोग एक्टिंग नहीं करते। मुझे हमेशा न ही मिली। मैं भी जिद्दी लड़की हूं। अपनी जिद पर अड़ गई। एक्टिंग में आ गई। शुरुआत में घरवाले भी अगेंस्ट हो गए थे। एक सेट पर तो मेरी पिटाई भी हो गई थी। सेट पर मेरे पैरेंट्स आ गए, उनको लगा यह क्या कर रही है। मुझे वहां बहुत बुरा लगा। मुझे लगा कि इन्हें इस काम के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इनके पास कोई उदाहरण नहीं है। उन्होंने बताया- वे अक्सर कहते थे कि अपने आसपास की लड़कियों को देखो। रिश्तेदारों की लड़कियों को देखो। वे बिल्कुल नॉर्मल है। तुम्हें भी वही करना चाहिए जो वो कर रही है। मैंने मम्मी-पापा को उस वक्त ही कह दिया था कि मैं नॉर्मल नहीं हूं। मुझे जो करना है, करके ही अपनी पहचान बनाऊंगी। उस दिन हमारी बहुत लड़ाई हुई। मैं चली गई। 10 साल तक बिल्कुल अलग-अलग सी रही। फिर मेरी फिल्म रनिंग शादी आई। इसे सुजीत सरकार ने प्रोड्यूस की थी। इसमें तापसी पन्नू और अमित साद जैसे एक्टर थे। इसके बाद जब घर आई तो सभी बहुत खुश थे। खासकर पापा, जिन्होंने मेरे आने पर मुझे माला पहनाई। उस समय तक जो मेरे अगेंस्ट थे, वे मेरे सपोर्ट में आ गए। आज चीजें बहुत बदल गई हैं। आज मेरे मम्मी-पापा मेरे सबसे बड़े सपोटर हैं। अब उनके पास मेरी शादी के सवाल आते हैं तो कहते हैं कि वह तो आगे निकल चुकी है। आप भी अपना देख लो। इससे कह सकती हूं कि मैंने अपने काम से अपने मम्मी-पापा को अर्न किया है। अब उनका दिमाग खुल गया है। सवाल: जब सभी खिलाफ थे, आपके सपनों को पूरा करने के लिए रोका जा रहा था, तब कैसे हिम्मत जुटाई? रिचा : जब मुझे मम्मी पापा बोलते थे सरकारी नौकरी, आईएएस की तैयारी करो। मुझे ऐसा लगता था कि मैं बुरी लड़की हूं। इनकी बात नहीं सुन रही। मैं उस वक्त किताब खोलकर पढ़ने बैठ जाती थी। एक दो दिन बाद मुझे लगता था कि मैं खुद से ही झूठ बोल रही हूं। मुझे तो एक्टिंग करनी है। उस वक्त सोचा कि अगर यह पढ़ने की एक्टिंग कर ली तो जीवन में कुछ नहीं हो पाएगा। मैंने मम्मी-पाप को कह दिया कि मुझे किसी को खुश नहीं करना है। खुद को खुश करना है। मैं जीवन में कभी यह कहना नहीं चाहती कि आपकी वजह से मैं अपना खुद का कुछ नहीं कर पाई। मैं कर लूंगी, लड़ लूंगी। सवाल: आपको किस तरह आगे बढ़ने से रोका गया, कितनी मुश्किलें आईं? रिचा: मेरा पहला प्रोजेक्ट नेशनल ज्योग्राफी के लिए था। उसके लिए शूट कर रहे थे। पूरा जर्मन क्रू था। जर्मन ही डायरेक्टर थे। युद्ध वाला सीन फिल्माया जा रहा था। वहां मम्मी-पापा आए। पापा किस बात पर गुस्सा हुए, पता नहीं। उन्होंने वहां मेरी पिटाई कर दी। डायरेक्टर और क्रू मेम्बर ने बचाया। तब मुझे बहुत बुरा लगा। उस रात मैं घर नहीं गई। मैं जयपुर की रिर्जव बैंक कॉलोनी में रहती थी। वहां गार्डन के पास मैं बैंच पर ही पूरी रात सोई थी। वहां सोच लिया था कि ऐसा तो नहीं चलेगा, सेट पर थप्पड़ खाकर मैं डरने वाली ताे नहीं हूं। उस वक्त सोच लिया कि उन्होंने अपना किया, अब मैं अपना करूंगी। यह सबसे मेजर हुआ। फिर बीच-बीच में शादी के लिए प्रेशर डाला गया। फिर मैंने सोचा कि अब मैं कैमरे के सामने नहीं, कैमरे के पीछे करूंगी। अपनी जिद से एक-दो जगह मैंने एग्जाम दिए और मैं पास भी हो गई। फिर मैंने घरवालों को कहा कि मुझे जाना है, मेरा एक्टिंग स्कूल में एडमिशन हो गया है। पैरेंट्स ने कहा- तू नहीं जाएगी, नहीं तो हम तेरे टीचर्स को आकर भला-बुरा बोल देंगे। वहां मुझे डर लगा कि एक बार तो हो चुका है। 200 लोगों के सामने बेइज्जती झेल चुकी हूं। फिर ये टीचर्स को बोल आएंगे। कैसे उन्हें अपना चेहरा दिखा पाउंगी। यहां मैं डर गई। तब सोचा कि मुझे क्या चाहिए यह घरवाले नहीं सोच रहे तो फिर अब मुझे किसी की नहीं सुननी। किसी को खुश नहीं करना है। मैंने अपने लिए स्टैंड लिया और सोचा कि अपनी पहचान बनानी है। अपने आप को प्रूव करना है। सवाल: जब सक्सेस मिली तो घर से किस तरह का रिएक्शन था? रिचा: एक दिन ऐसा था जब मेरी फिल्म ‘छेल्लो शो’ ऑस्कर गई, जो इंडिया की तरफ से ऑफिशिल एंट्री थी। उसकी खबर अखबारों में प्रकाशित हुई। सभी जगह इसकी खबर थी। इसके बाद मेरे पापा के पास फोन आने लगे। लोग पूछने लगे कि आपकी बेटी कहां है, उसकी शादी हो गई क्या? कब करेंगे शादी। पापा को उस दिन 200 फोन कॉल आ गए। पापा की चाय कप मैं वैसी की वैसी ही रह गई। उनका खाना भी समय पर नहीं हुआ। जबकि वे समय के बिल्कुल पाबंद है। हमारी कम्यूनिटी के ग्रुप में यह खबर वायरल हो गई थी, इसके बाद लोगों के रिएक्शन थे कि यह किसकी बेटी है। इनको तो हमें सम्मान देना चाहिए। पापा से मिलने बहुत सारे लोग आए थे। वहां से चीजें बदल गईं। यह सही है कि अब हमारे समाज की लड़कियां मुझसे सलाह लेती हैं। मेरे पास मैसेज भी आते हैं। मेरे समाज की कई लड़कियां बोलती है कि हम भी एक्टिंग करना चाहती हैं। घरवालों को आपके बारे में भी बताया है। जो मेरी स्ट्रगल रही है, अब वही मेरी ताकत बन गई है। मेरे माता-पिता अब मेरे सबसे बडे़ सपोर्ट सिस्टम है।
अब मुझे कह दिया गया कि जी लो अपनी जिंदगी। अब घरवाले ही मेरे बिहाव पर जवाब देते हैं। मम्मी-पापा को जिन लोगों से डर लगता था कि ये बाते बनाएंगे। आज वे ही लोग मम्मी-पापा का मान बढ़ाते हैं। मेरा मानना है कि मेरे काम की वजह से मेरे पैरेंट्स का मान बढ़ रहा है। वह सबसे बेस्ट है। मैंने खुद का रास्ता बनाया है, यह बहुत सुंदर जर्नी रही है। सवाल: आने वाले समय में किस तरह का काम देखने को मिलेगा? रिचा: आने वाले समय में कई प्रोजेक्ट हैं, जिनमें मैं काम रहा हूं। रूबरू फिल्म को अभी प्यार मिल ही रहा है। अभिषेक बच्चन के साथ केडी फिल्म है। एक एनएफडीसी की फिल्म की है। जो ब्रज भाषा में बनी है। मुझे हर तरह की फिल्म करनी है, हर भाषा में फिल्म करनी है। इंडिया तक लिमिट में नहीं रहना है। इंटरनेशनल प्रोजेक्ट करने है, कुछ मेरे फेवरेट डायरेक्टर है, उनके साथ करने का मन है।


