झारखंड में उत्पाद नीति और शराब बिक्री में हुई गड़बड़ी की एसीबी व ईडी जांच के बीच अब प्रधान महालेखाकार का स्पेशल ऑडिट भी शुरू हो गया है। देश के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) दिल्ली के आदेश पर चल रहे इस ऑडिट में छत्तीसगढ़ कनेक्शन और उत्पाद नीति में बार-बार बदलाव के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जांचा जा रहा है कि आखिर नीति को बदलने में कौन-कौन लोग शामिल थे। ऑडिट टीम ने शराब बिक्री और मैनपावर एजेंसियों के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया और होलोग्राम बदलने की भी जांच कर रही है। ऑडिट टीम को पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक सप्लाई मैनेजमेंट सिस्टम और ट्रैक एंट्री सिस्टम से काम नहीं हो रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि शराब बिक्री के बाद प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा पैसे जमा न कराने के कारणों की भी जांच की जा रही है। लेकिन विबरेज कॉरपोरेशन कई जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं करा रहा है। विबरेज कॉरपोरेशन ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम से शराब बिक्री का रिकॉर्ड भी नहीं दे रहा है। ऑडिट टीम के अधिकारियों ने इसकी शिकायत सरकार और प्रधान महालेखाकार से की है। महालेखाकार ने जवाब तलब करते हुए कई टिप्पणियां की हैं। इससे पहले उत्पाद विभाग और विबरेज कॉरपोरेशन का प्रारंभिक ऑडिट किया गया था। अब स्पेशल ऑडिट के तहत डिटेल्स ऑडिट किया जा रहा है। ऑडिट टीम अब गोदाम का भी वेरिफिकेशन करेगी। वहीं मुख्यालय के बाद जिलों के दुकानों और गोदामों का भी ऑडिट किया जाएगा। ऑडिट टीम ने सरकार को लिखा-विबरेज कॉरपोरेशन उपलब्ध नहीं करा रहा जरूरी दस्तावेज सदस्य राजस्व पर्षद सदस्य ने लिखा था-पूर्व के अनुभव के आधार पर निर्णय ले विभाग नई उत्पाद नीति लागू करने में सदस्य राजस्व पर्षद ने कई पहलुओं पर आपत्ति जताई थी। लिखा था कि विभाग को पूर्व के अनुभव के आधार पर निर्णय लेना चाहिए, जो सफल रहा हो। वर्ष 2009-10 से कई बार नीतियां बदली हैं। वर्ष 2009-10 से 2011-12 तक खुदरा और थोक बिक्री निजी हाथों में थी तो वार्षिक राजस्व वृिद्ध करीब 20 फीसदी थी। 2012-13 से 2016-17 तक थोक बिक्री विबरेज कॉरपोरेशन और खुदरा बिक्री निजी हाथों में थी तो भी राजस्व वृद्धि 20 फीसदी रही। फिर 2017 से 2019 तक तक खुदरा और थोक बिक्री विबरेज कॉरपोरेशन के पास रही तो राजस्व काफी घट गया। फिर 2019-20 में थोक बिक्री कॉरपोरेशन को और खुदरा बिक्री निजी हाथों में दी गई तो राजस्व 1000 करोड़ से बढ़कर 2000 करोड़ पर पहुंच गया। इसके बाद कोविड काल आ गया। मांगा जवाब… कॉरपोरेशन-विभाग बताए उत्पाद नीति बदलने से राजस्व पर क्या पड़ा असर ऑडिट टीम ने विबरेज कॉरपोरेशन और उत्पाद विभाग से पूछा है कि नीति में बार-बार बदलाव से राजस्व पर क्या असर पड़ा है। राजस्व संग्रह मामले में लक्ष्य की वसूली क्यों नहीं हो पाती। गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष में उत्पाद राजस्व के 2700 करोड़ रुपए के लक्ष्य के विरुद्ध 31 दिसंबर 2024 तक सिर्फ 1985 करोड़ रुपए की ही वसूली हुई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि राजस्व पर्षद के सदस्य की आपत्ति के बाद विभाग उनके द्वारा उठाए गए बिंदुओं को कहां तक लागू किया है। सूत्रों का कहना है कि ऑडिट द्वारा सवाल उठाने के बाद विभाग ने मैनपावर प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा बेचे गए शराब के पैसों की वसूली के लिए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम से शराब बेचने पर भी जोर दिया जा रहा है।


