भास्कर न्यूज | लुधियाना 69वें राष्ट्रीय स्कूल खेल 2026 के तीसरे दिन जूडो मुकाबलों में पंजाब के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खेल मैदान को रोमांच से भर दिया। लड़कों और लड़कियों दोनों वर्गों में पंजाब के खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा और मेहनत का लोहा मनवाया। मुकाबलों के दौरान दर्शकों में उत्साह चरम पर रहा और हर मुकाबला आखिरी पल तक सांसें थामे रखने वाला रहा। जिला शिक्षा अधिकारी डिंपल मदान, यूथ कोऑर्डिनेटर खेल कुुलवीर सिंह सलौदी, प्रिंसिपल कंवलजोत कौर, विश्वकीरत कौर काहलो, मीनू आदिया और प्रिंसिपल गुरजंट सिंह ने विभिन्न खेल मैदानों का दौरा कर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। डिंपल मदान ने आयोजन समितियों, लाइन अफसरों और स्कूल प्रिंसिपलों को खिलाड़ियों की रिहायश, खान-पान और आवागमन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। लड़कों के 14 वर्ष से कम आयु वर्ग में पंजाब का प्रदर्शन खासा प्रभावशाली रहा। 40 किलो भार वर्ग में पंजाब के युवराज ठाकुर ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। 35 किलो वर्ग में पंजाब के मोहित कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि 30 किलो वर्ग में भी पंजाब के शिवम शर्मा ने शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता। इन मुकाबलों में गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों ने भी कड़ी टक्कर दी, लेकिन पंजाब के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास और तकनीक के दम पर बाजी मार ली। 45 किलो भार वर्ग में गुजरात के रुसन मलिक मोहम्मद ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि पंजाब के लविश थापा ने रजत पदक हासिल किया। अन्य राज्यों के खिलाड़ियों ने कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। हर मुकाबले में खिलाड़ियों की फुर्ती, रणनीति और जज्बा देखने लायक रहा। लड़कियों के जूडो मुकाबलों में भी रोमांच अपने चरम पर रहा। 44 किलो भार वर्ग में हरियाणा की रियां ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि पंजाब की मनप्रीत कौर ने रजत पदक हासिल किया। 44 किलो से अधिक भार वर्ग में पंजाब की सीरत लूना ने स्वर्ण पदक जीतकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। 27 किलो भार वर्ग में पंजाब की मुस्कान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की गतका प्रतियोगिता में भी पंजाब की टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। चंडीगढ़ को रजत और मध्य प्रदेश को कांस्य पदक मिला। राष्ट्रीय स्कूल खेलों में जूडो के ये मुकाबले न केवल खिलाड़ियों की ताकत और कौशल का प्रदर्शन थे, बल्कि खेल भावना, अनुशासन और संघर्ष की सच्ची मिसाल भी बने। पंजाब के खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।


