भास्कर न्यूज | रायगढ़ राज्य शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप खनन प्रभावित और सुदूर वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। विकासखंड लैलूंगा इसका सशक्त उदाहरण है, जहां डीएमएफ मद से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिली है। डीएमएफ मद से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच) लैलूंगा में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. उपाध्याय की पदस्थापना के बाद संस्थागत और सुरक्षित प्रसव को ठोस आधार मिला है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक एमसीएच लैलूंगा में कुल 574 सुरक्षित प्रसव कराए गए हैं। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक 105 सिजेरियन और 469 सामान्य प्रसव होना इस बात का प्रमाण है कि विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता से गर्भवती महिलाओं का भरोसा शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा है। समय पर उपचार और निगरानी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। डीएमएफ मद से दंत चिकित्सक की तैनाती ने भी ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के नागरिकों को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2025-26 में दंत विभाग में अब तक 3063 ओपीडी मरीजों का पंजीयन हुआ, जिनमें से 1095 मरीजों का सफल उपचार किया गया। इससे दंत संबंधी समस्याओं के लिए लोगों को अब जिला मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।


