एआई के मानव व प्रकृति के संरक्षण में उपयोग की जरुरत है: डॉ. देशमुख

सिटी रिपोर्टर | भिलाई श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैंपस भिलाई में इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन एडवांसेज इन इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटिंग एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीज 2026 की शुरुआत 8 जनवरी को हुुई। यह सम्मेलन अपने छटवें संस्मरण में है, जो तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान में नई ऊंचाइयों को स्थापित करता है। इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन में मुख्य अतिथि संस्था के चेयरमैन एवं श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल विश्वविद्यालय के चांसलर आईपी मिश्रा, गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. वूई चिन लॉन्ग (प्रोफेसर, टेक्निकल विश्वविद्यालय मलेशिया), एसएसपीयू की इंचार्ज वाईस चांसलर डॉ. स्मिता सेलट, निर्देशक डॉ. पीबी देशमुख, शंकराचार्य महाविद्यालय के निदेशक डॉ. दुर्गा राव और प्राचार्य डॉ. अर्चना झा, चेयर डॉ. शिम्पी रल्हन, डॉ. समता गजभिये और डॉ सिद्धार्थ चौबे सहित विश्वविद्यालय के डीन, संस्था के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, विभिन्न स्थानों से आए शोधकर्ता, विद्यार्थी उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह में देश-विदेश के प्रख्यात शिक्षाविदों ने शिरकत की। पहले दिन इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटिंग और संचार प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों पर केंद्रित कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। संस्था के निदेशक डॉ. पीबी देशमुख उदाहरण देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ मंे प्रकृति एवं मानव संरक्षण में प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। मुख्य अतिथि चेयरमैन आईपी मिश्रा ने कहा कि आईसीएईसीटी 2026 का उद्देश्य शोधकताओं को एक ऐसा वैश्विक मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी नवीन खोजों को साझा कर सकें। यह सम्मेलन न केवल छात्रों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि शोध द्वारा तकनीकी प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नवाचार को बढ़ावा देने हम सदैव फैकल्टी एवं विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते रहे हैं और करते रहेंगे। इस प्रकार की कॉन्फ्रेंस से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। साथ ही उन्होने टेक्नोलॉजी के दुरूपयोग पर समुचित कदम उठाने पर जोर दिया। मुख्य वक्ता डॉ. वूई चिन लॉन्ग ने एआई का प्रयोग लाइटेनिंग के क्षेत्र मे होने वाली तकनीकों के भविष्य पर जोर डाला और उसे रिनिएबल एनर्जी से जोड़ा।

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