रामायण हमें जीना सिखाती है और गीता मरना: पं. रविशंकर तिवारी

भास्कर संवाददाता| सीहोर सनातन धर्मी हिंदू अहिंसा के पुजारी हैं, लेकिन शस्त्र हमारी शोभा हैं, हिंसक आतंकियों को दंड देना भी सनातनधर्मियों को आता है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने हमें यहीं सिखाया है। असुर रावण और कंस जैसे आतंकियों का वध राम-कृष्ण ने ही किया था। रामायण हमें कुशलता, परिवारिकता, सामाजिक बनकर जीना सिखाती है। रामायण रिश्तों, मित्रों और शत्रुओं को साधना सिखाती है, लेकिन कृष्ण की करूणा से भरी गीता हमें मरना सिखाती है। यह बात शिवशक्ति मंदिर महिला मंडल द्वारा पुलिस लाइन मंदिर परिसर में जारी संगीतमय श्रीमदभागवत कथा में पंडित रवि शंकर तिवारी ने कही। गुरुवार को कथा में श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालु महिलाएं पीले वस्त्र पहनकर पंडाल में पहुंची। खामखेड़ा जत्रा से पहुंचे पंडित रवि शंकर तिवारी के गुरू का मंच पर स्वागत सम्मान किया गया। शत्रुओं का नाश करना पाप नहीं पुण्य है पंडित रविशंकर तिवारी ने कहा कि हनुमान श्रीराम के परम भक्त थे, किंतु भक्ति में हनुमानजी अपनी शक्ति को भूल जाते हैं। फिर श्रीराम की कृपा से ही उन्हें शक्तिबल याद आता है। इसी प्रकार हम भी अपने बल को भूल बैठे हैं। रामायण में कहा गया है कि सृृष्टि के शत्रुओं का नाश करना पाप नहीं पुण्य है। साधू-संतों को परेशान करने वाले असुरों को भगवान ने परलोक भेज दिया था।

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