सब-रजिस्ट्रार-1 में रोक के बावजूद पांच साल तक होती रहीं रजिस्ट्रियां, जांच शुरू, रिकॉर्ड तलब किए

भास्कर न्यूज | जालंधर जालंधर डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) और रेवेन्यू विभाग की लापरवाही ने एक बार फिर सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेडीए ने 27 अगस्त 2021 को पत्र संख्या 2021/2956 जारी कर तहसीलदार और सब-रजिस्ट्रार-1 को मुबारकपुर कृष्णा नगर एन्क्लेव में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन बावजूद पांच साल तक रजिस्ट्रियां होती रहीं। इस मामले को लेकर पंजाब सरकार के रेवेन्यू विभाग ने जांच शुरू कर दी है। वीरवार को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में आरसी इंद्र समेत शेखे गांव के पटवारी गुरप्रीत सिंह, कानूनगो अवनिंदर सिंह और तहसील-1 के मुलाजिम साल 2021 से अब तक उक्त चिट्ठी से लेकर रजिस्ट्रियां, जमाबंदी का सारा रिकॉर्ड लेकर चंडीगढ़ तलब हुए हैं। एसआर-1 कार्यालय की तरफ से बुधवार को करीब 98 रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड सब्मिट किया गया था। उसमें कई रिकॉर्ड अधूरे थे। अब सोमवार को दोबारा रिकॉर्ड सब्मिट करने के लिए कहा गया है। दूसरी तरफ जालंधर डेवलपमेंट अथॉरिटी के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर नितेश कुमार जैन ने इस मामले पर फोन का जवाब नहीं दिया गया। जेडीए के पास अवैध कॉलोनियों पर सीधी कार्रवाई करने के साथ एफआईआर तक दर्ज करवाने की पूरी कानूनी शक्ति है। नियमों के अनुसार जेडीए चाहे तो अवैध कॉलोनी को सील या निर्माण गिरा सकता है और जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज करवा सकता है। लेकिन मुबारकपुर कृष्णा नगर एन्क्लेव के मामले में जेडीए ने सिर्फ एक चिट्ठी जारी करने के बाद कोई एक्शन नहीं किया। जबकि अगर एक्शन होता तो यह मामला पहले ही पता लगाया जा सकता था। न ही अवैध निर्माण रोका और ना कॉलोनाइजर पर एक्शन लिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लिखित आदेश था, तब रजिस्ट्रियां कैसे होती रहीं। सरकारी रिकॉर्ड में जेडीए की तरफ से चिट्ठी भेजने का रिकॉर्ड दर्ज है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि पंजाब सरकार के पुराने 12-12-2019 में बिना एनओसी के रजिस्ट्री करने के निर्देश थे, इसे लेकर सरकार की तरफ से पत्र भी जारी किया गया था। जिसके बाद यह रजिस्ट्रियां होती गईं। लेकिन सूबे में आप की सरकार बनने के बाद 24 और 26 मई 2022 को एनओसी के बिना रजिस्ट्री पर रोक लगाई जिसका डिटेल्ड नोटिफिकेशन 13-6-2022 को आया था। इसलिए उक्त कॉलोनी की रजिस्ट्रियां होती रहीं लेकिन जेडीए ने कभी दोबारा इस मामले पर रोक या बड़ी कारवाई नहीं की।

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