भोपाल बायपास के पेड़ों की सुनवाई अब दिल्ली NGT में:पेड़ों को काटने को लेकर स्टे अभी बरकरार रहेगा; NHAI को 2 दिन में दस्तावेज पेश करने को कहा

भोपाल के अयोध्या बायपास में हजारों पेड़ों की कटाई के मामले में स्थगन (स्टे) अभी बरकरार रहेगा। गुरुवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मामले की सुनवाई की। वहीं, एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) को दो दिन में दस्तावेज पेश करने को कहा है। 10 लेन सड़क बनाने के लिए एनएचएआई ने हजारों पेड़ काट दिए थे। वहीं, जो पेड़ बचे हैं, उन्हें लेकर एनजीटी में सुनवाई हुई। इस पर पर्यावरणविद् की भी नजर रही। वे पेड़ों को बचाने के लिए ‘चिपको आंदोलन’ तक कर चुके हैं। वहीं, अब इस मामले की सुनवाई दिल्ली एनजीटी में होगी। ताकि, पूरे देश में एक समान नीति बनाई जा सके। अब सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को दिल्ली स्थित एनजीटी में पेश होना होगा। बता दें कि एनएचएआई भोपाल के अयोध्या बायपास को आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 836.91 करोड़ रुपए से 10 लेन में बदल रहा है। यह 16 किलोमीटर लंबा है। इस प्रोजेक्ट में कुल 7871 पेड़ काटे जाने हैं, जो 40 से 80 साल तक के हैं। दिसंबर में तीन दिन में करीब आधे पेड़ काट दिए गए थे। इसका जमकर विरोध हुआ। इसके बाद मामला एनजीटी में पहुंचा और 8 जनवरी तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी गई थी। इसी पर गुरुवार को सुनवाई हुई। NGT ने नितिन सक्सेना विरुद्ध NHAI मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि जब तक उच्चतम न्यायालय में लंबित अपील पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक अधिकरण इस मामले की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाएगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने ट्रिब्यूनल को जानकारी दी कि प्रत्यर्थीगण (NHAI) ने NGT के 22 दिसंबर-25 को दिए आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। न्यायिक गरिमा का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने तक यहां सुनवाई स्थगित रखी जाए। इसके बाद प्रत्यर्थी (NHAI) के अधिवक्ता ने मौखिक रूप से कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली है। हालांकि वे इसके समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर NGT ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दो दिन के भीतर अपील वापस लेने के आधिकारिक दस्तावेज पेश करें। ​यदि अपील वापस नहीं ली गई है तो उच्चतम न्यायालय के निर्णय तक NGT इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं करेगा। याचिकाकर्ता सक्सेना ने बताया कि पेड़ों की कटाई के मामले में 22 दिसंबर को दिया गया स्थगन फिलहाल बरकरार रहेगा। इस निर्णय से याचिकाकर्ता को फौरी तौर पर बड़ी राहत मिली है, क्योंकि हजारों की संख्या में पेड़ कटाई पर लगी रोक अभी जारी रहेगी। सेंट्रल का प्रोजेक्ट, निगम के जरिए कटवाए गए पेड़
यह सेंट्रल का प्रोजेक्ट है। पिछले साल दिसंबर में अयोध्या बायपास के चौड़ीकरण के टेंडर समेत अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद एनएचएआई ने पेड़ काटने की सभी सरकारी अनुमति भी लेना थी, क्योंकि बायपास चौड़ीकरण का काम करने वाली एजेंसी और एनएचएआई के बीच जो एग्रीमेंट हुआ है, उसके अनुसार पेड़ कटाई जैसी सरकारी अनुमतियां दिलाना एनएचएआई की जिम्मेदारी ही है। इस साल 11 अगस्त तक पेड़ कटाई की अनुमति मिलने और फिर काम शुरू होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी बीच पेड़ कटाई का मामला एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में चला गया था। फिर एक अन्य मामले में एनजीटी ने आदेश दे दिया कि शहरों में कहीं भी 25 से अधिक पेड़ काटने की अनुमति हाई लेवल कमेटी देगी। इसके बाद नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय शुक्ला की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी का गठन हो गया। कमेटी की तीसरी मीटिंग में पेड़ काटने की मंजूरी दी गई। हरियाली को उजाड़ने के लिए हरी झंडी मिलते ही 21 दिसंबर से पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई। इतना तेज काम…अनुमति मिली और आरी चलाना शुरू
22 दिसंबर को कटाई का दौर जारी रहा तो याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना ने फिर से एनजीटी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 24 दिसंबर की दोपहर तक पेड़ काटने का दौर जारी रहा। इसी बीच एनजीटी ने पेड़ों की कटाई को 8 जनवरी तक रोकने के आदेश दिए, लेकिन तब तक एनएचएआई आधे से ज्यादा पेड़ कटवा चुका था। अब बाकी पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरणविद् ने मुहिम छेड़ दी है। पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे, उमाशंकर तिवारी, याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना, सुयश कुलश्रेष्ठ, राशिद नूर समेत अन्य लोगों ने कहा कि पेड़ों को काटकर एनएचएआई हरियाली उजाड़ रही है। 10 लेन सड़क के बदले एनएचएआई एलिवेटेड प्रोजेक्ट पर काम कर सकता था, या फिर 10 की बजाय सिक्सलेन बनाने पर जोर दें। जिन पेड़ों को एनएचएआई नगर निगम के जरिए काट रहा है, उनकी उम्र 40 से 80 साल तक है। एनएचएआई का दावा-सभी रिपोर्ट पेश की
एनजीटी के 8 जनवरी तक के रोक वाले आदेश पर एनएचएआई का भी अपना तर्क रहा है। एनएचएआई सूत्रों का कहना है कि पेड़ों को कटाने के मामले में कमेटी की रिपोर्ट पेश कर दी, लेकिन एनजीटी ने वह नहीं देखी। इस वजह से रोक लगी है। सुनवाई में यह रिपोर्ट पेश करेंगे। दूसरी ओर, 7871 के बदले 81 हजार पौधे लगाने का दावा भी है। कांग्रेसी भी कर चुके प्रदर्शन
पेड़ों की कटाई को लेकर कांग्रेस भी विरोध प्रदर्शन कर चुकी हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, रविंद्र साहू झूमरवाला समेत कई कांग्रेसियों ने मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया था। पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने बताया कि बायपास के दोनों ओर जो भी पेड़ काटे जा रहे हैं, उनमें से कई की उम्र 80 से 100 साल या इससे अधिक है। इनके बदले यदि नए पौधे लगाए भी जाएंगे तो उनके पेड़ बनने में सालों बीत जाएंगे। NHAI ने पेड़ों के बदले यह प्लान बनाया था ये खबर भी पढ़ें… भोपाल के अयोध्या बायपास पर 81 हजार पौधे रोपेगा NHAI भोपाल के आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 16 किमी लंबे अयोध्या बायपास में जिन पेड़ों को काटा जाएगा, उसके बदले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) 81 हजार पौधे रोपेगा। दूसरी ओर, 10 लेन करने के प्रोजेक्ट में सेंट्रल वर्ज की चौड़ाई को 5 मीटर से घटाकर 1.5 मीटर किया जा रहा है। यह बदलाव सिर्फ उस इलाके में होगा, जहां हरियाली है। ऐसा करने से 2075 पेड़ बचेंगे।पूरी खबर पढ़ें

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