मेकाहारा में बिना चीर-फाड़ हार्ट ऑपरेशन…:वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान बंद हुईं हृदय की नसें, स्टेंट से चिमनी बनाकर डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान

अंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बार फिर जटिल हार्ट प्रक्रिया कर एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई है। एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में ट्रांसकैथेटर आर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। शहर की रहने वाली महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से पीड़ित थी। जांच में पाया गया कि उनका आर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम बनाई गई। डॉक्टरों ने बिना चीर-फाड़ पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी के अनुसार, वर्ष 2025 में विभाग ने 2600 से अधिक जटिल हार्ट ऑपरेशन किए हैं। टीम ने ऐसे किया ऑपरेशन कई तरह की गंभीर जटिलताओं से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर उनके और वाल्व के बीच चिमनी संरचना तैयार की। प्रक्रिया के आखिरी स्टेज में वाल्व डिलीवरी के दौरान बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज आ गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह फिर से स्थापित किया गया। लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के आर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया। हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा तथा हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर रही। ऑपरेशन टीम में डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. शिवकुमार शर्मा, कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बालस्वरूप साहू, डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस, कैथलैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद, स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र शामिल थे। इस दौरान आईं ये परेशानियां

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