घाघरा-लूगड़ी में ‘चोटी’ फतेह:डोटासरा बोले- ‘बाबाजी, ये कानून का उल्लंघन है’; नरेश मीणा का ऐलान- ‘BJP में नहीं जाऊंगा’

नमस्कार जयपुर में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी विधायक बालमुकुंदाचार्य से कहा- बाबाजी आप काले शीशों में चल रहे हो, यह कानून का उल्लंघन है। बूंदी में नरेश मीणा ने कहा कि बीजेपी डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को रिप्लेस करने के लिए उन्हें बुला रही है। दौसा की धौली मीणा ने दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में 4696 मीटर ऊंची पर्वत चोटी घाघरा-लूगड़ी में फतेह कर ली। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. बालमुकुंदाचार्य से बोले डोटासरा- ये कानून का उल्लंघन उनका नाम गोविंद सिंह डोटासरा है। वे पीसीसी के चीफ हैं। उन्होंने वकालत की पढ़ाई भी की है। वे वकील होते तो कोर्ट में राजनीति करते। लेकिन वे राजनीति में हैं, इसलिए कभी-कभार उनके भीतर का वकील बाहर आ ही जाता है। खासतौर से तब, जब उन्होंने काली पैंट और सफेद शर्ट पहनी हो। संयोग से उन्होंने यही गणवेश पहनी थी। वे विधानसभा के परिसर में खड़े धूप सेंक रहे थे। वकालत की पढ़ाई करने वाला एक छात्र-दल विधानसभा परिसर में आया तो वकालत शिक्षित होने के नाते डोटासरा जी ने उनके साथ फोटो खिंचाया। इस दौरान एक सफेद कार परिसर में दाखिल हुई। कार में भाजपा विधायक काला चश्मा लगाकर पहुंचे। पहले विधायक महोदय ने डोटासरा जी को कॉम्प्लिमेंट दिया- आज तो वकील साहब लग रहे हो आप। इसके बाद बारी चीफ साहब की थी। उन्होंने कॉम्प्लिमेंट की जगह कमेंट किया और वकील होने के नाते कानून याद दिलाया। बोले- बाबाजी आप ब्लैक शीशों में चल रहे हो। यह कानून का उल्लंघन है। डोटासरा जी काले चश्मे पर कमेंट नहीं कर रहे थे। कार के शीशे काले थे। 2. ‘मरते दम तक बीजेपी में नहीं जाऊंगा’ जो बात राहत इंदौरी साहब ने कही थी, वही अब नरेश मीणा कह रहे हैं- बुलाती है मगर जाने का नहीं। हालांकि इंदौरी साहब का आशय ‘दुनिया’ से था, लेकिन नरेश मीणा का मतलब भाजपा से है। बूंदी में उन्होंने भरी सभा में कहा- पूरी बीजेपी कहती है कि नरेश मीणा आजा। आजा कि हम तुझको किरोड़ी लाल जी की जगह देना चाहते हैं। यह बात कहते हुए नरेश मीणा ने साफ किया कि उन्हें बुलाने में भाजपा का क्या स्वार्थ है। उन्होंने कहा- इससे उनके दो स्वार्थ सिद्ध होंगे। एक तो किरोड़ी लाल जी निपट जाएंगे। दूसरा नरेश मीणा की दुकान भी बंद हो जाएगी। इसके बाद मीणा जी ने तर्जनी उठाकर भीष्म पितामह की तरह प्रतिज्ञा सी ली- मरते दम तक बीजेपी में नहीं जाऊंगा। 3. हाथ से उखाड़ दी ईंटें एक युवक ने बहुत तेज गति से दीवार की ईंटों को अंगुलियों से ढहा दिया। उसने पूरी लाइन ही उखाड़ फेंकी। युवक कराटे, कुंग-फू या मार्शल आर्ट का प्रदर्शन नहीं कर रहा था। निर्माण ही इतना घटिया किया जा रहा था कि 8 साल का बच्चा भी यह करतब दिखा देता। आटे में नमक की तरह बजरी में सीमेंट मिलाई गई थी। लगभग रेत के भरोसे ही पूरा निर्माण किया जा रहा था। यह नहर तक जाने वाला एक नाला था, जिसमें बहकर पानी किसानों के खेत तक पहुंचना है। किसानों को पता चला कि नाला बनाने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है तो वे कोहरा छंटने से पहले ही मौके पर पहुंच गए और काम की पोल खोल दी। 4. चलते-चलते… कुछ लोग अपनी स्थानीय बोली बोलने में संकोच करते हैं। बल्कि घर में बच्चे अगर स्थानीय बोली बोलें तो उन्हें टोक देते हैं। कहते हैं- गंवार हो क्या? अंग्रेजी में बच्चा बात करे तो उसे शान समझा जाता है। यही बात पहनावे के साथ है। कई लोग अपनी संस्कृति और क्षेत्र का पहनावा पहनने में भी संकोच करते हैं। शर्म महसूस करते हैं। ऐसे लोगों को दौसा की बेटी धौली मीणा से सीखना चाहिए। धौली के पति फॉरेन विभाग में अधिकारी हैं। उनकी पोस्टिंग दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में है। पति की नौकरी के कारण धौली विदेशी धरती पर ही रहती हैं। लेकिन न तो उन्होंने अपनी भाषा बदली और न ही पहनावा। यही उनकी पहचान बन गई और विदेशी लोग उनसे प्रेरित होते हैं। उनका सम्मान करते हैं। हाल ही धौली मीणा ने इक्वाडोर की सबसे ऊंची बर्फीली पर्वत चोटी पर तिरंगा लहराया। चोटी की ऊंचाई 4 हजार 696 मीटर है। कठिन चढ़ाई और सर्द मौसम के बावजूद धौली घाघरा-लूगड़ी जैसे परिधान में ही पहाड़ पर चढ़ीं। अपने कल्चर से इतना लगाव रखने और गर्व महसूस करने वाली धौली मीणा को सैल्यूट। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *