श्योपुर जिले के कई गांवों में हिरन और नीलगाय किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। रन्नोद, तिल्लीपुर चरोंद, अडुसा, नागरगांवड़ा और सोंठवा सहित आसपास के गांवों में ये जानवर खेतों में घुसकर चना, मेथी और गेहूं की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिन-रात खेतों में घुस रहे जानवर किसानों का कहना है कि हिरन और नीलगाय दिन और रात दोनों समय झुंड में खेतों में पहुंच जाते हैं। कुछ ही घंटों में तैयार फसलें चौपट हो जाती हैं। किसान कुंदन अकोदिया और लखन वैरवा ने बताया कि चने की फसल पूरी तरह चर ली गई है, जबकि मेथी और गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गई हैं। लागत निकालना भी मुश्किल किसानों ने बताया कि फसलों पर की गई मेहनत और खर्च अब डूबता नजर आ रहा है। नुकसान इतना ज्यादा है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। राजस्थान से आ रहे जानवर ग्रामीणों का कहना है कि हिरन और नीलगाय पास के राजस्थान क्षेत्र से श्योपुर के गांवों तक पहुंच रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में जंगल होने के कारण जानवरों की आवाजाही बढ़ गई है, लेकिन उन्हें रोकने के लिए कोई पक्की व्यवस्था नहीं है। अपने स्तर पर कर रहे बचाव किसान खेतों के चारों ओर कंटीली झाड़ियां लगा रहे हैं, तारबंदी कर रहे हैं और रातभर खेतों की रखवाली भी कर रहे हैं। इसके बावजूद जानवरों से फसलों को बचाना मुश्किल हो रहा है। वन विभाग से मांगी मदद किसानों ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग की है। उन्होंने प्रभावित गांवों में गश्त बढ़ाने, सोलर फेंसिंग लगाने और अन्य प्रभावी इंतजाम करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।


