बड़वानी में गणिनी आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। वे जैन मुनि विद्या भूषण सन्मति सागर जी महा मुनिराज की शिष्या हैं। भोपाल में चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट और पावागिरी जी ऊन जैसे सिद्ध क्षेत्रों की वंदना करते हुए उनका पहली बार आगमन हुआ है। उनके संघ में तीन आर्यिका माताजी शामिल हैं। आर्यिका संघ सिद्ध क्षेत्र बावनगजा, तीर्थंकर लेणि, सिद्ध क्षेत्र मांगीतुंगी और गजपंथा की वंदना करेगा। इसके बाद वे आगामी माह में नमोकर तीर्थ पर होने वाले भव्य पंच कल्याणक महोत्सव में सम्मिलित होंगी। आरती उतारकर लिया आशीर्वाद आर्यिका संघ के मंगल प्रवेश पर समाज के श्रावकों ने पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। उनकी अगवानी के लिए मुनि श्री प्रणुत सागर जी के संघस्थ क्षुल्लक विनियोग सागर जी भी उपस्थित थे। जिन मंदिर में आर्यिका संघ ने भगवान की वेदियों के दर्शन किए। मुनि श्री प्रणुत सागर जी से आशीर्वाद लिया। धर्म सभा से पूर्व समाजजनों ने आर्यिका श्री, मुनि श्री और क्षुल्लक जी महाराज को शास्त्र भेंट किए। धर्मसभा का मंगलाचरण कल्पना काला द्वारा किया गया। इस मौके पर विश्वयश मति जी माता जी ने संक्षिप्त कविता पंक्तियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य अच्छे कार्यों का श्रेय स्वयं लेना चाहता है, जबकि बुरे कार्यों के लिए ईश्वर को दोष देता है। गणिनी आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ने मुक्तक और काव्य शैली में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “जिसका प्रभु से वास्ता है, वही सच्चा नाश्ता है।” माताजी ने पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज बेटा बाप को सिखा रहा है, जिससे सभ्यता तो आई है, लेकिन संस्कृति और संस्कार बिगड़ गए हैं। उन्होंने पाप को परिणाम की विकृति बताया और कहा कि धर्म के नाम पर लड़ने के बजाय धर्म के लिए लड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि कहीं भी किए गए पाप मंदिर में प्रक्षालित हो सकते हैं, लेकिन मंदिर में किए गए पाप कहीं भी प्रक्षालित नहीं होते। माताजी बोलीं- राम जैसा बेटा चाहती हैं, टीवी पर चरित्रहीन चरित्र देख रहीं माताजी ने कहा कि आज हर मां राम जैसा बेटा चाहती है। टीवी पर चरित्रहीन के चरित्र देख रही है, तो राम जैसे पुत्र कैसे होंगे? पाश्चात्य की हवा ने हमें हिला दिया है। माताजी के द्वारा महावीर जी तीर्थ पर और शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर साधु संतों और त्यागी वृत्तियों के आहार की व्यवस्था करवा रखी है। मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि आज से मंदिर का कार्य प्रारंभ हो रहा है। माताजी का उसके ठीक पहले आगमन हुआ, ये शुभ मंगल का प्रतीक है। भरा हुआ कलश ,गाय का बछड़े को दूध पिलाने का ये मंगल शुभ संकेत होते है। ऐसे में मां का आगमन शुभ संकेत है। महाराज ने बताया कि आप जिस भी व्यक्ति को जिस प्रकार से देखोगे, उसी प्रकार से दिखेगा। आज विनियोग सागर जी क्षुल्लक जी के मंगल अवतरण दिवस पर आर्यिका संघ और प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान कर शास्त्र भेंट किया। प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि जब पुण्य का जलवा चलता है, तब पाप का दिल जलता है। इस अवसर पर जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा बच्चे उपस्थित थे। प्रवचन पश्चात मुनि संघ आर्यिका संघ की आहार चर्या हुई। दोपहर को माताजी का मंगल बिहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के लिए हुआ। शाम को क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी के पाद प्रक्षालन, और प्रवचन हुए ।


