ग्वालियर उपभोक्ता आयोग सख्त,एलआईसी को 12 हजार देने के निर्देश:कहा-: तकनीकी आधार पर दावे खारिज नहीं कर सकतीं बीमा कंपनियां, आवेदन पर 45 दिन में लें निर्णय

ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी आधार पर उपभोक्ताओं के वैध दावों को खारिज नहीं कर सकतीं, क्योंकि ऐसा करना ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। आयोग ने एलआईसी को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता के पॉलिसी निरस्तीकरण आवेदन पर 45 दिन के भीतर निर्णय ले और मानसिक व आर्थिक क्षति के एवज में 12 हजार रुपए का हर्जाना अदा करे। एलआईसी ने पॉलिसी निरस्त की पर राशि नहीं दी यह मामला 67 वर्षीय रामनिवास शर्मा से जुड़ा है। उनके अधिवक्ता अच्युत शर्मा के अनुसार रामनिवास शर्मा ने मई 2024 में एलआईसी की एक बीमा पॉलिसी खरीदी थी, लेकिन उन्हें कभी भी पॉलिसी बॉन्ड प्राप्त नहीं हुआ। आर्थिक जरूरत पड़ने पर उन्होंने 24 जून 2024 को एलआईसी कार्यालय में पॉलिसी निरस्त कर जमा राशि वापस करने के लिए आवेदन किया। एलआईसी ने पॉलिसी निरस्तीकरण की सूचना तो दे दी, लेकिन भुगतान नहीं किया। इसके बाद बुजुर्ग उपभोक्ता को बार-बार एलआईसी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने नोटिस भी भेजा, लेकिन इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। एलआईसी का तर्क-समयसीमा के बाद मिला आवेदन एलआईसी ने आयोग में दलील दी कि पॉलिसी बॉन्ड 25 मई 2024 को पंजीकृत डाक से भेज दिया गया था। कंपनी का कहना था कि पॉलिसी रद्द कराने के लिए 30 दिन की ‘कूलिंग ऑफ’ अवधि होती है और परिवादी का आवेदन तय समय सीमा के बाद प्राप्त हुआ, इसलिए उसका दावा खारिज किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने एलआईसी की दलील को अस्वीकार करते हुए माना कि उपभोक्ता को समय पर पॉलिसी बॉन्ड नहीं मिलना और निरस्तीकरण के बाद भुगतान न करना सेवा में कमी है। आयोग ने रामनिवास शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एलआईसी को तय समय में निर्णय लेने और 12 हजार रुपए हर्जाना देने के निर्देश दिए हैं।

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