जयपुर के सुनियोजित विकास की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने एक नई पहल की है। राज्य की पहली लैंड पूलिंग योजना के सफल क्रियान्वयन के बाद जेडीए अब अन्य विकास प्राधिकरणों और नगर विकास न्यासों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जेडीए के मंथन सभागार में एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जयपुर मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारियों के साथ साझा किया गया। दरअसल, सरकार जयपुर की तर्ज पर अन्य जिलों में भी लैंड पूलिंग योजना को लागू करना चाहती है। ऐसे में अजमेर, भरतपुर, उदयपुर और बीकानेर विकास प्राधिकरणों के साथ-साथ भीलवाड़ा और अलवर नगर विकास न्यास के वरिष्ठ अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े आज जेडीए अधिकारियों के साथ जुड़े। जेडीए की अतिरिक्त आयुक्त और लैंड पूलिंग अधिकारी प्रतिभा पारीक ने अपनी टीम के साथ योजना की पूरी रूपरेखा, प्रक्रिया और व्यावहारिक अनुभवों को विस्तार से प्रस्तुत किया। किसानों और खातेदारों के हितों को दी गई प्राथमिकता राजस्थान लैंड पूलिंग योजना अधिनियम-2016 के तहत टोंक रोड क्षेत्र के शिवदासपुरा, बरखेड़ा और चंदलाई गांवों में करीब 163 हेक्टेयर भूमि पर यह महत्वाकांक्षी योजना विकसित की जा रही है। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों और खातेदारों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। भूमि देने वाले खातेदारों को उनकी कुल भूमि का 45 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूमि के रूप में वापस मिलेगा। चौड़ी सड़कों, पार्कों और जनसुविधाओं के लिए स्थान आरक्षित कार्यशाला में बताया गया कि इस योजना के तहत आधुनिक नगर नियोजन को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों, पार्कों और जनसुविधाओं के लिए समुचित स्थान आरक्षित किया गया है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि जयपुर शहर के नियोजित और संतुलित विकास को भी मजबूती मिलेगी। अब अन्य जिलों में भी लैंड पूलिंग योजनाएं लाने की तैयारी जेडीए के इस सफल मॉडल को समझने के बाद अब अन्य जिलों के विकास प्राधिकरण भी अपने-अपने क्षेत्रों में इसी तरह की लैंड पूलिंग योजनाएं लाने की तैयारी कर रहे हैं। बैठक में जेडीए के वरिष्ठ नगर नियोजक (मास्टर प्लान), उपायुक्त, जोन-14 के तहसीलदार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अन्य जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं से अवगत हुए। बता दें कि जेडीए की यह पहल प्रदेश में सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में शहरों का विकास अधिक पारदर्शी, संतुलित हो सकेगा।


