झारखंड में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने जा रही है। मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गठित एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) और राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस देने पर सहमति बन गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जल्द ही दोनों संस्थानों को औपचारिक लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही झारखंड उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है। रिम्स को लाइसेंस मिलने के बाद किडनी ट्रांसप्लांट की वास्तविक शुरुआत में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। इस अवधि में अस्पताल प्रबंधन को तकनीकी और मानव संसाधन से जुड़ी तैयारियां पूरी करनी होंगी। रिम्स प्रबंधन ने किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए जगह चिन्हित कर ली है। यह यूनिट सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग के पांचवें तल्ले पर स्थापित की जाएगी, जहां फिलहाल एसएसआईसीयू संचालित है। एसएसआईसीयू को यहां से शिफ्ट करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
राहत… हर साल 5 हजार मरीज ट्रांसप्लांट के लिए जाते हैं बाहर
आंकड़ों के अनुसार, झारखंड से हर साल करीब 3 से 5 हजार मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, चेन्नई, वेल्लोर, हैदराबाद और मुंबई जाते हैं। बाहर इलाज कराने में मरीजों और उनके परिजनों को भारी आर्थिक बोझ, लंबा इंतजार और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। राज्य में ही ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से यह मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह फैसला झारखंड के मरीजों के लिए बड़ी राहत है और इसे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाएगा।
चुनौती: विशेषज्ञ मौजूद, लेकिन मैनपावर की कमी
रिम्स में वर्तमान में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, सुपर स्पेशियलिटी और क्रिटिकल केयर विभाग पहले से संचालित हैं। इन विभागों के लिए अनुभवी चिकित्सकों की टीम, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और सोटो की टीम भी उपलब्ध है। हालांकि नेफ्रोलॉजी विभाग में अभी केवल एक वरीय चिकित्सक हैं। किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए अतिरिक्त फैकल्टी, मेडिकल ऑफिसर, आरएमओ, स्थायी नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन की जरूरत बताई गई है। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। आगे क्या… अन्य अंग प्रत्यारोपण में भी पहल
बैठक में लिवर व हार्ट ट्रांसप्लांट पर भी चर्चा हुई। 15 जनवरी को 10 मेडिकल कॉलेजों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जा सके। मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत बाहर इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या कम करने पर भी विचार हुआ। गरीबों को सीधा फायदा, बाहर जाने से राहत
में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने से राज्य की गरीब जनता सीधा लाभ मिलेगा। पहले रोगियों को बाहर जाना पड़ता है। 6 माह के भीतर राज्य में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया जाएगा। इसके बाद हार्ट व लंग्स ट्रांसप्लांट शुरू किए जाएंगे। -इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री


