आरटीओ ने एसओ, स्टेनो, जूनियर सहायक, क्लर्क को सौंपे काम

विक्की कुमार | अमृतसर पंजाब में “आप’ की सरकार बनते ही सरकारी दफ्तरों में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक ड्यूटी करने के सख्त निर्देश जारी किए गए थे। मगर सरकार का कार्यकाल जैसे-जैसे आगे बढ़ा निर्देश फाइलों तक ही सीमित रह गए। सबसे ज्यादा खराब स्थिति रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) के है। रामतीर्थ रोड स्थित दफ्तर में दोपहर 2 बजे ही ताले लटक जाते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, परमिट या अन्य जरूरी कामों के लिए दोपहर बाद पहुंचने वाले लोगों को बैरंग लौटना पड़ता है। हैरानी की बात यह कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हाल बन चुका है। लोगों का कहना है कि आरटीओ दफ्तर में दोपहर बाद सन्नाटा पसरा रहता है। लोगों की शिकायतों के बाद दैनिक भास्कर टीम शुक्रवार को दोपहर साढ़े 3 बजे रामतीर्थ रोड स्थित रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस पहुंची। सेक्शन अफसर (एसओ) का दफ्तर खाली मिला। इसके अलावा स्टेनो गुरप्रीत सिंह के दफ्तर पर भी ताला लटका था। क्लर्क विक्रम सिंह की दफ्तर भी बंद मिला। काफी समय बैठकर कर्मचारियों के आने का इंतजार किया गया मगर कोई नहीं पहुंचा। आरटीओ खुशदिल सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि उनके पास स्टाफ काफी कम है और जो स्टाफ है वह ज्यादातर अदालतों में ही लगा रहता है। क्योंकि कई केसों संबंधी कर्मचारी अदालतों में जाते रहते हैं, जिसके चलते थोड़ी परेशानी हो जाती है। उन्होंने कहा कि वैसे तो बाकी का स्टाफ अपनी ड्यूटी पूरी करके ही जाता है, अगर कुछ लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं तो वह चेक करवाएंगे। वहीं ट्रैक पर स्थित डॉक्टर के दफ्तर बारे उन्होंने कहा कि उनकी डयूटी दोपहर 1 बजे तक ही है। सरकार की साथ ही कुछ एग्रीमेंट इसी तरह का हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को उसके बाद मेडिकल करवाना हो तो वह कहीं से भी करवा सकता है, कोई बाउंडेशन नहीं है कि वहीं से ही मेडिकल करवाया जाए। किला गोबिंदगढ़ स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर डॉक्टर के दफ्तर का भी यही हाल है। यहां पर डॉ. अमरजीत सिंह नागी का दफ्तर है। लोग अपने लाइसेंस रिन्यू व अन्य कामों संबंधी मेडिकल की जरूरत होती है तो उनसे मेडिकल सर्टिफिकट बनवाना होता है, लेकिन वह दोपहर एक बजे तक ही दफ्तर में बैठते हैं। उसके बाद अगर जरूरत हो तो लोगों को वह घर पर बुला लेते हैं। आरटीओ दफ्तरों में इस तरह की लापरवाही से सरकार के ‘गुड गवर्नेंस’ के दावे सवालों के घेरे में हैं। जनता पूछ रही है कि जब दफ्तर ही समय से पहले बंद हो जाएंगे तो पारदर्शिता और सुविधा के बड़े-बड़े दावे किस काम के? चुनाव से पहले सरकार व्यवस्था सुधारने की बात करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी दफ्तरों में नियमों का पालन कराने वाला कोई नहीं है। आरटीओ की स्थिति इस बात का साफ संकेत है कि आदेश जारी करना आसान है, लेकिन उन्हें लागू कराना सरकार के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। लोगों का कहना है कि दोपहर 2 बजे के बाद दफ्तर बंद, कर्मचारी गायब, यही नजारा देखने को मिलता है। हैरानी की बात है कि जब सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश हैं कि दफ्तर शाम 5 बजे तक खुले रहेंगे तो फिर यह दफ्तर 2 बजे ही क्यों बंद हो जाते हैं? और इससे भी बड़ा सवाल कि इस पर नजर रखने वाला आखिर कौन है? रिजनल ट्रांसपोर्ट अफसर खुशदिल सिंह संधू ने बीते दिनों कई कर्मचारियों को इधर से ऊधर भी किया। डाटा एंट्री ऑपरेटर वरिंदर कौर को किला गोबिंदगढ़ स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक से हटाकर मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर दफ्तर में तैनाती दी है। दफ्तर में वह मंगलवार और शुक्रवार को बतौर सहायक काम करेंगी। बाकी के 3 दिन सहायक ट्रांसपोर्ट अफसर की ओर से जारी हिदायतों के मुताबिक अदालत की ओर से जारी समन भुगतने का काम देखेंगी। एसओ गुरमनदीप सिंह को अपने पहले काम के साथ दफ्तरी कर्मचारियों की सर्विस बुक से संबंधित काम का इंचार्ज नियुक्त किया जाता है। स्टेनो गुरप्रीत सिंह को सीरीज पीबी-02-बीए से मौजूदा सीरिज तक का काम। ट्रेड सर्टिफिकेट का काम, प्रदूषण चेक सेंटर का काम सौंपा है। उनके साथ डाटा एंट्री ऑपरेटर हरप्रीत सिंह और रोशनदीप सिंह को बतौर सहायक काम सौंपा है। जूनियर सहायक रविंदर सिंह को आरटीआई एक्ट 2005 के तहत बतौर एपीआईओ नियुक्त किया है। लर्निंग लाइसेंस संबंधी, कंडक्टर लाइसेंसों का काम, ड्राइविंग लाइसेंस की रिन्यूअल संबंधी काम दिया है। उनके साथ डाटा एंट्री आपरेटर रिच नाग बतौर सहायक काम करेंगी। जूनियर सहायक राजपाल सिंह के साथ डाटा एंट्री ऑपरेटर हरप्रीत सिंह को बतौर सहायक काम सौंपा है।

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