भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने जो तबाही मचाई, उसकी टीस अब भी लोगों के चेहरों पर साफ दिखती है। हालांकि हालात धीरे-धीरे काबू में आ रहे हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों का दर्द अब भी जिंदा है। एक समय 446 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती थे, जो अब घटकर 50 रह गए हैं। इनमें से 10 मरीज आईसीयू में हैं, इनमें से 3 की वेंटिलेटर पर हैं। फिलहाल इलाके में टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है, जबकि कई परिवार मजबूरी में आरओ का पानी पी रहे हैं। रहवासियों के मुताबिक 23 से 25 दिसंबर के तीन दिन सबसे भयावह साबित हुए। इन्हीं दिनों घरों तक ऐसा पानी पहुंचा, जिसकी बदबू और स्वाद ने लोगों को सशंकित जरूर किया, लेकिन पानी देखने में साफ होने के कारण अधिकांश लोगों ने उसका उपयोग कर लिया। बाद में जब सच्चाई सामने आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अपनों को खोने का गम इन तीन दिनों की यादों को और भी कड़वा बना गया। तीन दिन में बदला सब कुछ
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में पहले भी गंदा पानी आता रहा था, लेकिन 23 से 25 दिसंबर के बीच जो पानी सप्लाई हुआ, वह बिल्कुल अलग था। बाद में पता चला कि उस पानी में बेहद बारीक कीड़े मौजूद थे। इसके बाद उल्टी-दस्त की शिकायतें तेजी से बढ़ीं और कुछ ही दिनों में मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कई परिवार 26 और 27 दिसंबर तक वही दूषित पानी पीते रहे, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए। ऐसे शुरू हुआ मौतों का सिलसिला परिजनों और रहवासियों की बातें
अशोकलाल पंवार की पत्नी शोभा ने बताया कि 23 दिसंबर को उनके पति को तेज उल्टी-दस्त शुरू हुए। 24 दिसंबर को अरविंदो अस्पताल में उनकी मौत हो गई। शोभा का कहना है कि उस समय आया पानी बहुत बदबूदार और कड़वा था। उसमें बारीक कीड़े भी थे। उनके पति पहले पूरी तरह स्वस्थ थे। इलाके की रहने वाली कौशल्या ने बताया कि 23 और 24 दिसंबर के बीच आए पानी का स्वाद बहुत खराब था। उन्हें भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। पांच दिन तक आईसीयू में रहने के बाद वे घर लौटीं। इलाज में उन्हें 40 हजार रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़े। बाद में पता चला कि पड़ोसी नंदलाल की भी इसी कारण मौत हो गई। आशा प्रजापत ने बताया कि पानी डिब्बों में भरकर रखने पर ढक्कन खोलते ही तेज और अजीब बदबू आती थी। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि सरकार आंकड़ों में नहीं उलझेगी। एक भी व्यक्ति की मौत दुखद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नगर निगम के रिकॉर्ड के आधार पर मौतों की संख्या तय होगी। जो भी संख्या सामने आएगी, सभी प्रभावित परिवारों को राहत राशि दी जाएगी। सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है। ये खबर भी पढ़ें… सबसे पहले 2 बच्चों में मिले थे हैजा जैसे सिम्टम्स इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 लोगों की मौत हो गई है। आईसीयू में 15 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 2 की हालत क्रिटिकल बताई जा रही है। कुल एडमिट मरीजों की संख्या 110 है, जबकि एक हफ्ते पहले एडमिट मरीजों की संख्या 398 थी। इस बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया है कि समय रहते बच्चों में हैजा जैसे सिम्टम्स पता चल गए, नहीं तो स्थिति कुछ और हो सकती थी।पूरी खबर पढ़ें बोरिंग में हैजा वाला बैक्टीरिया…पार्षद का बोर भी दूषित इंदौर के भागीरथपुरा में बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला है। यह हैजा, टाइफॉइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है। यहां से लिए गए पानी के 60 में से 35 सैंपल फेल हो गए हैं। वार्ड के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला का बोरिंग भी दूषित पाया गया है।पूरी खबर पढ़ें


