नक्सलियों को अब पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी में बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी की जिम्मेदारी संभाल रहे मोहन कड़ती ने अपनी पत्नी सुमित्रा कड़ती समेत 62 अन्य साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें 36 इनामी नक्सली भी शामिल हैं। इन पर करीब 1.19 करोड़ रुपए का इनाम है। सरेंडर करने वाले 63 नक्सलियों में कोई भी हथियार अपने साथ नहीं लाया है। इनका कहना है कि उनके हथियार पहले ही लूटे जा चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 45 पुरुष और 18 महिलाएं हैं। ये सभी लंबे वक्त से दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे। इस सरेंडर से सबसे बड़ा झटका नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी को लगा है। मोहन कड़ती और उसकी पत्नी सुमित्रा कड़ती के कंधों पर ही इस पूरे इलाके का जिम्मा था। नक्सल संगठन को रणनीतिक तौर पर मदद करने के साथ ही मोहन उनका फाइनेंस मैनेजर भी था, जबकि पत्नी सुमित्रा एंबुश लगाने और हमलों की प्लानिंग की मास्टरमाइंड रही है। संगठन में इनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि नेशनल पार्क एरिया से भैरमगढ़ तक उनकी टीम का खौफ रहा है। मोहन ने बताया कि मद्देड़ में मुठभेड़ के दौरान उसकी पत्नी की इंसास राइफल जवानों ने बरामद कर ली थी। जबकि उसकी 9 एमएम पिस्टल नक्सली बुचन्ना लेकर भाग गया था। बाद में वह भी मुठभेड़ में मारा गया। नवंबर में हुई इसी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 6 नक्सलियों को ढेर कर दिया था। मोहन के मुताबिक, संगठन छोड़ने की बड़ी वजहों में फोर्स का बढ़ता दबाव, स्थानीय लोगों का घटता समर्थन और सूचना लगातार पुलिस तक पहुंचना है। मोहन के नाम से ही जारी होते थे अधिकांश प्रेस नोट
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक और संरचनात्मक नुकसान है। खासकर पश्चिम बस्तर डिवीजन के लिए संगठन के अधिकांश प्रेस नोट भी मोहन के नाम से ही जारी होते रहे थे। नक्सलियों ने सीआरपीएफ डीआईजी राकेश चौधरी, एसपी गौरव राय और सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियन के कमांडेंट के सामने सरेंडर किया। अफसरों ने बताया कि “लोन वर्राटू’ अभियान के तहत दंतेवाड़ा में अब तक 1224 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। इनमें 369 इनामी हैं। बस्तर के भविष्य के लिए एक निर्णायक परिवर्तन
दंतेवाड़ा में 63 माओवादियों का मुख्यधारा से जुड़ना बस्तर के भविष्य के लिए एक निर्णायक परिवर्तन है। यह पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा व विकास नीति का परिणाम है।
-विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छग


