इंदौर के जिस भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई और तीन गंभीर रूप से बीमार हैं। उसे 2023 में शहर का सबसे स्वच्छ वार्ड घोषित कर अवॉर्ड दिया गया था। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने न सिर्फ मंच से वार्ड-11 के पार्षद कमल वाघेला की तारीफ की पुल बांधे थे, बल्कि उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया गया था। अब सवाल उठ रहा है कि जिस वार्ड को स्वच्छता और विकास का मॉडल बताया था, वहां इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हो गई। महापौर के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने पर अगस्त 2025 में भागीरथपुरा में विकास कार्यों के भूमिपूजन का कार्यक्रम हुआ था। उसमें भी भार्गव ने वार्ड में विकास कार्यों की बड़ी तारीफ की थी। ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। जिसमें महापौर भागीरथपुरा को इंदौर का सबसे अच्छा और स्वच्छ वार्ड बताते नजर आ रहे हैं। इस दौरान मंच पर पार्षद कमल वाघेला भी मौजूद थे। महापौर ने मंच से भागीरथपुरा के विकास कार्यों की जमकर तारीफ की और अन्य वार्डों के पार्षदों को यहां आकर काम देखने की सलाह दी थी। ड्रेनेज और पानी की लाइन पर 2 करोड़ खर्च महापौर ने कहा था कि पार्षद कमल वाघेला ने तीन साल में 24 सड़कें बनवाई हैं, जिनमें प्रत्येक की लागत करीब 10 लाख रुपए है। यानी कुल 2.40 करोड़ रुपए की सड़कें बनी हैं। इसके अलावा ड्रेनेज लाइन और पानी की लाइन पर भी लगभग इतनी ही राशि खर्च की गई है। उन्होंने बताया था कि पार्षद ने तीन साल में करीब 10 करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए हैं, जो सालाना औसतन तीन करोड़ रुपए बैठता है। मेयर ने कहा था-भागीरथपुरा का काम आकर देखें महापौर ने मंच से कहा था कि मेयर होने के नाते वे भागीरथपुरा को अच्छे काम का सर्टिफिकेट दे रहे हैं और जिन वार्डों में बस्तियां हैं, उनके पार्षदों को भागीरथपुरा आकर काम देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्षद हमेशा विकास कार्यों के लिए फॉलोअप करते हैं और उन्होंने कभी उनके काम नहीं रोके। कार्यक्रम में महापौर ने पार्षद कमल वाघेला की व्यक्तिगत तारीफ करते हुए कहा था कि वे संगठन के व्यक्ति हैं और जरूरत पड़ने पर सख्ती से काम लेना भी जानते हैं। 2 साल से भागीरथपुरा में सप्लाई हो रहा था गंदा पानी भागीरथपुरा में दूषित पेयजल सप्लाई का सिलसिला दो साल से चल रहा था। 29 फरवरी 2024 को क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को लिखे एक पत्र में स्पष्ट कहा था कि क्षेत्र के रहवासियों को गंदे पानी के कारण टाइफाइड, पीलिया एवं बुखार की समस्या हो रही है। एक 23 वर्षीय युवती की मौत तक हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो पार्षद के पत्र के दो दिन पहले महापौर ने भी वहां का निरीक्षण किया था। नर्मदा और ड्रेनेज लाइन पास पास मिलीं। कई जगह पेयजल पाइप लाइन में टूट- फूट भी नजर आई। यानी दो साल पहले ही स्पष्ट हो गया था कि भागीरथपुरा में ड्रेनेज मिला पानी सप्लाई हो रहा था। सिंघार ने कहा था-नोट गिनने की मशीन क्यों रखी भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर निशाना साधा था। उन्होंने सवाल उठाया था कि महापौर कार्यालय में नोट गिनने की मशीन क्यों रखी गई है। क्या ठेकेदारों से नगद लेन-देन होता है या इसके पीछे कोई और कारण है? सारा दोष अधिकारियों पर मढ़ा भागीरथपुरा में हुई मौतों के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। रेसीडेंसी कोठी में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में हुई बैठक में महापौर ने कहा था कि एमआईसी और संबंधित अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। उन्होंने यहां तक कहा था कि वे ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकते।


