बालाघाट जिले के नक्सल मुक्त कराए गए सूपखार जंगलों में अब एशियाई जंगली भैंसें (बुबेलस अर्नी) बसाई जाएंगी। इसके लिए मप्र वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूपखार वन क्षेत्र में जंगली भैंसों के लिए तीन बड़े एनक्लोजर बनाए जा रहे हैं, जो फरवरी के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। असम से 15 जंगली भैंसों की पहली खेप मार्च के पहले सप्ताह में बालाघाट पहुंचेगी। असम वन विभाग ने तीन वर्षों में तीन चरणों में कुल 50 जंगली भैंसें देने की सहमति दी है। हर साल फरवरी-मार्च में काजीरंगा और मानस नेशनल पार्क से 15-15 और अंतिम चरण में 20 भैंसें मप्र लाई जाएंगी। कान्हा टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित सूपखार क्षेत्र के घास के मैदान देश के श्रेष्ठ घास मैदानों में गिने जाते हैं। यहां ऊंची घास, घना जंगल, पर्याप्त पानी वन्यजीवों के लिए अनुकूल है। नक्सलियों के कारण वन विभाग की नियमित पेट्रोलिंग बाधित होती थी। मप्र पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शुभरंजन सेन के अनुसार नक्सली दखल खत्म होने के बाद अब संरक्षण कार्य प्रभावी ढंग से हो सकेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल से लगभग एक सदी बाद मप्र में जंगली भैंसों की वापसी होगी।


