रोजाना आरती में शामिल होता है कुत्ता:कोंडागांव के शीतला मंदिर में 4 साल से रोज पहुंच रहा ‘मोती’; बाढ़ से बचने मॉक ड्रिल

कोंडागांव शहर के शीतला माता मंदिर में एक स्ट्रीट डॉग ‘मोती’ पिछले चार वर्षों से नियमित रूप से सुबह-शाम की आरती में शामिल हो रहा है। यह घटना स्थानीय लोगों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। मंदिर के पुजारी श्याम चरण निषाद ने बताया कि जैसे ही सुबह और शाम को मंदिर की घंटियां और शंख बजते हैं, ‘मोती’ कहीं से भी दौड़कर मंदिर परिसर में पहुंच जाता है। वह मंदिर खुलने से पहले ही बाहर बैठकर दरवाज़ा खुलने का इंतज़ार करता है। प्रसाद लेकर शांति से लौट जाता है मोती आरती के दौरान, ‘मोती’ भक्तों की तरह ही माता की मूर्ति के सामने सिर झुकाकर शांत भाव से बैठ जाता है। वह पूरी आरती के समय बिना किसी शोर या चंचलता के वहीं मौजूद रहता है। आरती समाप्त होने पर जब प्रसाद दिया जाता है, तो वह श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करता है और फिर शांति से लौट जाता है। पुजारी श्याम चरण निषाद के अनुसार, ‘मोती’ का मंदिर आना कभी नहीं छूटा, चाहे बारिश हो या तेज़ धूप। उन्होंने बताया कि कई बार जब मंदिर में कोई भक्त नहीं होता, तब वे और ‘मोती’ ही माता के सामने आरती से पहले बैठ जाते हैं। ग्राम बम्हनी में बाढ़ बचाव का मॉक ड्रिल राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ग्राम बम्हनी में बाढ़ बचाव पर एक मॉक एक्सरसाइज का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य जिले में बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने की तैयारियों का आकलन करना था। इस मॉक ड्रिल को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और ग्रामीण उपस्थित रहे। एनडीआरएफ टीम ने बाढ़ की स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने, फंसे लोगों को बचाने और प्राथमिक उपचार देने की पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रदर्शन किया। टीम ने बताया कि बाढ़ के दौरान घबराने के बजाय सही जानकारी और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके जान बचाई जा सकती है। मॉक ड्रिल के दौरान दी विस्तार से जानकारी मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ राहत और बचाव में उपयोग होने वाली सामग्रियों की विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें लाइफ जैकेट और पाइप बॉय शामिल थे, जो तेज बहाव में तैरने और संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। रेस्क्यू रोप और बोट का उपयोग फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए किया जाता है। प्लास्टिक की खाली बोतलों को आपस में बांधकर अस्थायी फ्लोटेशन डिवाइस के रूप में प्रयोग करने का तरीका भी बताया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध बांस और नारियल का उपयोग तैरने में सहायक के रूप में भी प्रदर्शित किया गया। टीम ने यह भी बताया कि घर पर उपलब्ध सामान्य साधनों से अस्थायी जीवन रक्षक उपकरण कैसे तैयार किए जा सकते हैं, ताकि आपात स्थिति में तत्काल सहायता मिल सके। ड्रिल के दौरान यह भी दिखाया गया कि बाढ़ में फंसे व्यक्ति को किस रणनीति से सुरक्षित बाहर निकाला जाता है, रेस्क्यू के बाद उसे प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाता है, और फिर स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित कैसे पहुंचाया जाता है।

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