कोरबा में नए खदान को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन:13 गांव प्रभावित; गोंगपा विधायक ने कहा- फैसला ग्रामीण करेंगे

कोरबा के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित पुटी पखना में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम के नेतृत्व में एक महापंचायत जन आंदोलन आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण आदिवासी शामिल हुए। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वन अधिकार पट्टे की मांग और रूंगटा कोल माइंस खदान के प्रस्तावित विस्तार का विरोध करना था। विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा लगभग चार प्रभावित ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों पर दबाव बनाकर जबरन प्रस्ताव लिए जा रहे हैं। इसका मकसद रूंगटा कोल माइंस के लिए भूमि अधिग्रहण की प्राथमिक प्रक्रिया शुरू करना है। अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेतावनी मरकाम ने कहा कि क्षेत्र में पहले से ही दो कोयला खदानें संचालित हैं, जिनके कारण पर्यावरण, जल, जंगल और स्थानीय आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। एक और खदान खुलने से आदिवासी समाज का अस्तित्व संकट में आ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो ग्राम पंचायतें खदान के लिए सहमति देंगी, उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। विधायक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, “हमारी जमीन हमारा कोयला है। ग्रामीण ही फैसला करेंगे कि जमीन देनी है या नहीं।” खदान से 13 गांव प्रभावित जनपद सदस्य संतोषी मरावी ने बताया कि प्रस्तावित खदान से 298 हेक्टेयर जमीन, 6 ग्राम पंचायतें और 13 गांव प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि यहां के लोग लंबे समय से काबिज हैं, लेकिन उन्हें अब तक वन पट्टा नहीं मिला है, जिसकी मांग की जा रही है। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से परेशान ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पहले से संचालित रानी अटारी और विजय बेस्ट कोयला खदानों के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं, जिससे वे काफी परेशान हैं। पसान तहसीलदार ने जानकारी दी कि खदानों और वन अधिनियम के तहत पट्टे की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसे उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोरबा पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा।

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