सागर मंथन से अमृत और 14 रत्नों का जन्म होता है: निरंजन महाराज

भास्कर न्यूज | बालोद ग्राम पसौद के स्वर्ण जयंती प्रांगण में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा व ज्ञान महायज्ञ के पांचवें दिन कथावाचक पंडित निरंजन महाराज ने गजेंद्र मोक्ष और राजा बलि प्रसंग का वर्णन किया। कथावाचक ने बताया कि गजेंद्र मोक्ष, सागर मंथन, देवासुर संग्राम और वामन अवतार जैसी कथाएं भगवान विष्णु के अवतार और लीलाओं का अद्भुत चित्रण करती हैं। गजेंद्र मोक्ष में हाथी और मगरमच्छ की कथा है, जिसमें भक्त पूर्ण समर्पण से मोक्ष प्राप्त करता है। सागर मंथन से अमृत प्राप्ति और 14 रत्नों का जन्म होता है। वामन अवतार में भगवान ने राजा बलि का अभिमान चूर कर पृथ्वी को पुनः देवताओं को दिलाया। पंडित निरंजन महाराज ने बताया कि गजेंद्र मोक्ष में गज (हाथी) को मगरमच्छ ने पकड़ा था। कई वर्षों तक चले संघर्ष के बाद जब गज थक गया, उसने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान ने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का सिर काटकर गज की रक्षा की। वामन अवतार में भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। अपने विराट रूप में उन्होंने धरती, आकाश और पाताल नाप कर राजा बलि का अभिमान तोड़ा। राजा बलि ने हाथ जोड़कर प्रभु के समक्ष नतमस्तक होकर तीसरा पग अपने सर पर रखने की प्रार्थना की। मौके पर नारायण महराज, परमेश्वर महराज, डॉ. रोशन टीकरिहा, चंद्रिका प्रसाद, पंडित संतोष शास्त्री, आशा राम साहू, अनुसुइया बाई, ईश्वरी लाल साहू, गायत्री, भूषण लाल साहू, तेजस्विनी बाई साहू सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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