स्टाम्प शुल्क बचाने करोड़ों की जमीन दो टुकड़ों में खरीदी:MLA संजय पाठक की पत्नी निधि पर आरोप, 4 करोड़ की जमीन 96 लाख में किया सौदा

प्रदेश के सबसे अमीर विधायक व खनन कारोबारी संजय पाठक की पत्नी निधि पाठक पर जमीन खरीदने के दौरान स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क की कथित चोरी करने का आरोप लगा है। इस मामले में न्यायालय कलेक्टर स्टाम्प ने जांच शुरू करते हुए निधि पाठक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आरोप है कि शासन को मिलने वाले राजस्व को बचाने के लिए करोड़ों रुपए मूल्य की एक चक जमीन को दो भागों में बांटा गया। इसे चार दिन के अंतराल में दो अलग-अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से खरीदा गया। क्या है मामला जानकारी के अनुसार, यह मामला कटनी नगर निगम सीमा अंतर्गत महाराणा प्रताप वार्ड स्थित एक भूमि से संबंधित है। वंदना सरावगी पति सतीश सरावगी निवासी हनुमानगंज वार्ड की खसरा नंबर 289/8, 289/9 और 289/23 की कुल 10400 वर्गफीट भूमि निधि पाठक ने खरीदी थी। निधि पाठक ने खरीदी है जमीन निधि पाठक ने यह जमीन दो विक्रय पत्रों के जरिए खरीदी। पहला विक्रय पत्र 20 दिसंबर 2021 को 1050 वर्गफीट के लिए और दूसरा 24 दिसंबर 2021 को 9350 वर्गफीट के लिए निष्पादित किया गया। शिकायतकर्ता राजू गुप्ता का आरोप है कि एक चक की जमीन को दो टुकड़ों में इसलिए खरीदा गया, ताकि मुख्य सड़क की कलेक्टर गाइडलाइन से बचकर स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क बचाया जा सके। शुल्क चोरी के तरीके पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि 10400 वर्गफीट की एक चक भूमि में से सबसे पहले पिछले हिस्से (9350 वर्गफीट) को 21 दिसंबर 2021 को खरीदा गया। उस समय तत्कालीन कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार इसका मूल्यांकन 6600 रुपए प्रति वर्गमीटर था। ठीक चार दिन बाद, आगे का हिस्सा (1050 वर्गफीट) खरीदा गया, जहां तत्कालीन कलेक्टर गाइडलाइन 40 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर थी। इस प्रकार, दोनों जमीनों के सौदे क्रमशः 57 लाख 35 हजार 70 रुपए और 39 लाख 3 हजार 200 रुपए में निष्पादित किए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, डबल रोड की जमीन होने के कारण इस सौदे का वास्तविक मूल्य 4.26 करोड़ रुपए होना चाहिए था। पंजीयन में चौहद्दी भी गलत दर्शाई गई है। विक्रेता और खरीददार दोनों को नोटिस शिकायत की जांच करते हुए न्यायालय कलेक्टर ऑफ स्टाम्प द्वारा विक्रेता वंदना सरावगी पति सतीश सरावगी व खरीददार निधि पति संजय पाठक को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि 16 जनवरी तक लिखित जवाब प्रस्तुत करें। यदि जवाब नहीं आता है तो भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 40 के तहत मुद्रांक शुल्क एवं शास्ति वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

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