बारां में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत विभिन्न गांवों और कस्बों में ‘गुड सेमेरिटन’ कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद के लिए आमजन को जागरूक करना था, जिसमें बताया गया कि मदद करने वाले को इनाम भी मिलेगा। प्रभारी अधिकारी डॉ. कल्पना शर्मा और जिला सड़क सुरक्षा समिति, बारां के निर्देशन में लोगों को केंद्र सरकार की ‘गुड सेमेरिटन’ योजना के बारे में जानकारी दी गई। इस योजना के तहत घायलों की मदद करने वाले नेक व्यक्तियों को 25 हजार रुपए का नकद इनाम दिया जाता है और उन्हें कानूनी झंझटों से बचाया जाता है। योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला महत्वपूर्ण घंटा) के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाना है। मददगारों पर पुलिस पूछताछ या अस्पताल में रुकने का दबाव नहीं डाला जाता, न ही उन्हें गवाह बनने के लिए मजबूर किया जाता है, ताकि लोग निडर होकर मदद कर सकें। कार्यशाला में बताया गया कि ‘गुड सेमेरिटन’ वह व्यक्ति है जो किसी मोटर वाहन दुर्घटना के बाद घायल की तत्काल सहायता करता है। लोगों को गोल्डन आवर के भीतर घायल को अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने, एम्बुलेंस को कॉल करने और पुलिस को सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया। इस जागरूकता अभियान में सहायक प्रोग्रामर प्रमोद पांडे, सुरेश मीना और मनोज चौधरी ने सक्रिय भूमिका निभाई। बारां, बोहत, मांगरोल, रामगढ़, रेलावन, गरड़ा, केलवाड़ा, भंवरगढ़ और किशनगंज के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों, पुलिस थानों, चौकियों और चौराहों पर यातायात नियमों की जानकारी दी गई और पंपलेट वितरित कर लोगों को दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की तुरंत मदद करने के लिए प्रेरित किया गया।


