कोंडागांव में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआत की:योजना में बदलावों को मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताया, मजदूरी की गारंटी की मांग

कोंडागांव में कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान की औपचारिक शुरुआत की। यह राष्ट्रव्यापी अभियान एआईसीसी और पीसीसी के निर्देश पर चलाया जा रहा है। पीसीसी द्वारा नियुक्त प्रभारी और जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने प्रेसवार्ता में पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए जा रहे बदलाव गरीबों और मजदूरों के संवैधानिक काम के अधिकार पर सीधा हमला है। मनरेगा बदलाव पर विवाद, ग्रामीणों का काम अब तय करेगी सरकार जैन ने बताया कि पहले मनरेगा के तहत हर ग्रामीण परिवार को 15 दिनों के भीतर काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। नए बदलावों के बाद यह अधिकार समाप्त कर दिया गया है। अब सरकार यह तय करेगी कि किस ग्राम पंचायत को काम मिलेगा और किसे नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे मनरेगा एक अधिकार-आधारित योजना के बजाय सरकार की मर्जी पर निर्भर ‘रेवड़ी’ बन जाएगी। न्यूनतम वेतन और बढ़ोतरी का प्रावधान खत्म करने का आरोप उन्होंने मजदूरी के अधिकार पर भी हमले का आरोप लगाया। पहले न्यूनतम मजदूरी और वार्षिक बढ़ोतरी का प्रावधान था, लेकिन अब मजदूरी मनमाने ढंग से तय होगी। फसल कटाई के मौसम में काम पर रोक लगाने से मजदूरों की मोलभाव करने की शक्ति कमजोर होगी, जिससे उन्हें कम मजदूरी पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। रेखचंद जैन ने ग्राम पंचायतों की शक्तियां छीनकर ठेकेदारों को सौंपने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार, पहले विकास कार्यों की योजना ग्राम सभाओं द्वारा बनाई जाती थी, लेकिन अब निर्णय दिल्ली से लिए जाएंगे। इससे पंचायतें केवल आदेशों का पालन करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएंगी। पूर्व विधायक नए प्रावधानों से राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा उन्होंने यह भी बताया कि नए प्रावधानों से राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। अब मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को वहन करना होगा, जिससे काम उपलब्ध कराने में कटौती हो सकती है। कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत चार प्रमुख मांगें रखी हैं: काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी, जवाबदेही की गारंटी और मनरेगा में किए गए सभी बदलावों की वापसी। इसके साथ ही, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये तय करने की भी मांग की गई है। इस अभियान के तहत 12 से 29 जनवरी 2026 तक ग्राम पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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