खंडवा में बढ़ते अपराध, रोजगार संकट और पेयजल समस्या को लेकर शनिवार शाम 6 बजे जिला व शहर कांग्रेस कमेटी ने गांधी भवन में संयुक्त प्रेसवार्ता की। इसमें कांग्रेस ने पुनासा में हुई करोड़ों की डकैती, किल्लौद में फ्लोराइड युक्त पानी, मनरेगा में बजट कटौती और ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में गंदगी जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश में अपराध पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। पुनासा के सोलंकी मार्केट में सराफा व्यापारी के साथ दिनदहाड़े हुई करोड़ों की डकैती ने कानून-व्यवस्था की असल तस्वीर उजागर कर दी है। उन्होंने कहा कि बाजार के बीचों-बीच जानलेवा हमला, हवाई फायरिंग और बदमाशों का आसानी से फरार हो जाना यह साबित करता है कि अपराधियों में पुलिस का कोई डर नहीं है। यह घटना भाजपा सरकार के सुशासन के दावों की पोल खोलती है। किल्लौद के 7 गांवों में जहरीला पानी प्रेसवार्ता में किल्लौद ब्लॉक के 7 से अधिक गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी की गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया गया। उत्तमपाल सिंह ने बताया कि दूषित पानी के कारण ग्रामीणों के दांत खराब हो रहे हैं, जोड़ों में दर्द और हड्डियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 7-8 महीनों से शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने सिर्फ हैंडपंपों पर लाल निशान लगाकर औपचारिकता निभाई है। न तो दूषित जल स्रोत बंद किए गए और न ही स्वच्छ पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। ओंकारेश्वर में सीवेज का पानी नर्मदा में मिल रहा तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में मिल रहे गंदे पानी का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शहर के दोनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बंद पड़े हैं, जिससे कई स्थानों पर सीवेज का गंदा पानी सीधे नर्मदा नदी में मिल रहा है। गौमुख घाट जैसे पवित्र स्थल पर गंदगी मिलने से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। भाजपा मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने कहा, “मनरेगा देश के करोड़ों ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन भाजपा सरकार बजट में कटौती कर इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है।” उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना, समय पर मजदूरी न देना, काम के अवसर कम करना और राज्यों पर दबाव बनाना इस योजना को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा के लिए पर्याप्त बजट आवंटित हो, अन्यथा कांग्रेस आंदोलन करेगी।


