पुशांत मोदगिल/ लुधियाना|उत्तर भारत के उल्लास के पर्व लोहड़ी से ठीक पहले शहर की तंग गलियों से लेकर चौड़े बाजारों तक हवा में केवल रंग-बिरंगे कागजों की सरसराहट और मांझे की खुशबू है। अपनी विविधता के लिए जाना जाता लुधियाना इस बार भी नया ऐतिहासिक रोमांच का मंच बनने जा रहा है। पिछले चार दशकों से शहर के पतंग जगत के बड़े नाम अविनाश बाशा ने बताया, पतंगबाजी केवल शौक नहीं बल्कि इबादत है। वे भावुक होकर बताते हैं हमारी परंपरा की शुरुआत माता रानी के स्वरूप वाले तारा पतंग से होती है। इस सीजन में उनकी दुकान का आकर्षण 20 फुट का विशालकाय पतंग है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग उमड़ रहे हैं। इस साल जहां युवाओं के बीच भैंसा स्टाइल पतंग सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा है वहीं लोगों का कनाडा प्रेम भी आसमान में उड़ने को तैयार है। चाइनीज को ना, सूती को हां एक सकारात्मक बदलाव यह है कि इस बार लुधियाना के दुकानदार और ग्राहक सुरक्षा को लेकर सजग हैं। जानलेवा चाइनीज डोर के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले सूती धागे की मांग बढ़ी है। दुकानदार खुद ग्राहकों को जागरूक कर रहे हैं ताकि इस त्योहार की खुशियों में किसी मासूम या परिंदे की जान का जोखिम न रहे।


