रायपुर-टेडेसरा कॉरिडोर:जितना उपयोग, उतना चार्ज; प्रति किमी लगेगा 2 रुपए टैक्स

छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स में शामिल रायपुर-टेडेसरा इकोनॉमिक कॉरिडोर पर वाहन चालकों को प्रति किलोमीटर 2 रुपए की दर से टोल टैक्स चुकाना होगा। 92.23 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर पूरी दूरी तय करने पर कुल 184 रुपए टोल देना पड़ेगा। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के किनारे बसे स्थानीय निवासियों को भी टोल टैक्स का भुगतान करना होगा। यह प्रदेश की पहली सड़क होगी, जहां यात्रियों से दूरी के अनुसार किलोमीटर आधारित टोल वसूला जाएगा। लेकिन, 3000 रुपए वाला पास मान्य रहेगा। एनएचएआई के अनुसार, परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 40 प्रतिशत कार्य शेष है। इस कॉरिडोर पर कुल छह इंटरचेंज बनाए जा रहे हैं, जिनमें राजनांदगांव के देवादा, दुर्ग के कोल्हियापुरी, पाटन के फुंडा-देवादा, अभनपुर के कोलार, झांकी और पारागांव शामिल हैं। इन्हीं इंटरचेंज के गेट पर टोल की गणना की जाएगी। वाहन चालकों से एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश के समय शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन जैसे ही वे कॉरिडोर से बाहर निकलेंगे, फास्टैग के माध्यम से प्रति किलोमीटर के हिसाब से राशि स्वतः कट जाएगी। एनएचएआई 2 हजार करोड़ रुपए की लागत से मुंबई-कोलकाता इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत राजनांदगांव-दुर्ग-रायपुर के बीच यह 92.23 किलोमीटर लंबा सिक्सलेन बायपास बना रहा है। परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। दुर्ग से अभनपुर तक 45 किलोमीटर सड़क का निर्माण एसएमएस प्राइवेट लिमिटेड और मल्होत्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कर रही हैं, जबकि टेडेसरा से दुर्ग तक 47 किलोमीटर सड़क का निर्माण शिल्के कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मे है। यह सिक्सलेन बायपास राजनांदगांव के टेडेसरा गांव से शुरू होकर रायपुर के पारागांव में समाप्त होगा, जहां वाहनों के लिए 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा निर्धारित रहेगी। परियोजना को अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य परियोजना के लिए राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर जिलों में भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है, हालांकि कुछ भू-स्वामियों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। यह भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया वर्ष 2016 से चल रही है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 300 पुल-पुलियों का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 270 का काम पूरा हो चुका है। शेष 30 पुल-पुलियों के अलावा बिजली खंभों और हाईटेंशन लाइनों की शिफ्टिंग, कुछ हिस्सों में डामरीकरण, सड़कों का निर्माण और इंटरचेंज का कार्य बाकी है। परियोजना को अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। माल ढुलाई तेज से हो सकेगी
इस बायपास से राज्य के स्टील, सीमेंट और पावर सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। दुर्ग–भिलाई औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई तेज होगी और रायपुर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन तथा बड़े औद्योगिक हब तक पहुंच आसान बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। बायपास के आसपास रहने वाले लोगों को भी इस परियोजना से बेहतर कनेक्टिविटी और जमीन के दाम बढ़ने की उम्मीद है। यह रायपुर-दुर्ग बायपास छत्तीसगढ़ के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माना जा रहा है। दोनों ओर रहेगी दीवार
टेडेसरा से रायपुर तक इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। 60% कार्य पूरा हो चुका है। इस सड़क पर यात्रियों से किमी के हिसाब से टोल वसूला जाएगा। दोनों ओर दीवारें बनाई जाएंगी, ताकि अनधिकृत प्रवेश न हो सके।
-दिग्विजय सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर

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