बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों में घिर गई है। आयोजन से जुड़े टेंट, भोजन, टॉयलेट, बिजली, फोटोग्राफी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए टेंडर 5 जनवरी 2026 को खोला गया, लेकिन जिस अमर भारत किराया भंडार रायपुर को यह काम मिला उसने एक महीने पहले से ही आयोजन स्थल पर काम शुरू कर दिया था। जसपाल को इसका टेंडर मिला है जो सत्ताधारी दल के एक प्रभावशाली नेता के करीबी बताए जा रहे हैं। सबसे खास बात ये है कि लगभग 6 करोड़ के काम में 2 करोड़ सिर्फ अस्थायी टॉयलेट बनाने पर खर्च किए गए हैं। भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो से साफ है कि दिसंबर 2025 से ही टेंट, अस्थायी टॉयलेट, मंच और अन्य संरचना बनाने का काम शुरू हो गया था। जबकि आधिकारिक रूप से उसी फर्म को 5 जनवरी को वर्क ऑर्डर जारी हुआ। इससे यह समझा जा सकता है कि टेंडर प्रक्रिया केवल औपचारिकता थी और ठेका पहले से हो चुका था। अस्थाई टायलेट पर दो करोड़ के टायलेट बनाए गए :इसी तरह टेंडर दस्तावेजों में दर्शाई गई दरें भी चौंकाने वाली हैं। एक सामान्य टॉयलेट का रेट 22 हजार रुपए रखा गया है और ऐसे 400 टॉयलेट बनाए गए हैं, यानी केवल इस मद में करीब 88 लाख रुपए का खर्च हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी राशि में स्थायी आरसीसी टॉयलेट बनाए जा सकते हैं, न कि अस्थायी ढांचे। इसके अलावा वीआईपी और वीवीआईपी टॉयलेट, यूरिनल और वॉशरूम मिलाकर यह खर्च दो करोड़ रुपए से अधिक पहुंचता है। यही नहीं, वीआईपी कुर्सियां, डिनर टेबल, टेंट, चेयर कवर और वॉशबेसिन जैसी मदों में भी बाजार भाव से कई गुना ज्यादा दरें तय की गई हैं। 340 टेंट के लिए 19 हजार रुपए प्रति टेंट और 100 वीआईपी डिनर टेबल के लिए 12,500 रुपए प्रति टेबल जैसी दरें टेंडर में दर्ज हैं।
बिना विधिवत टेंडर खुले निर्माण कार्य
दरअसल बृजमोहन अग्रवाल ने टेंडर को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद इस आयोजन को स्थगित करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि 10 करोड़ रुपये की राशि सीधे जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में स्थानांतरित किया गया, जो संस्था की स्वायत्तता और वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। इसी तरह बिना विधिवत टेंडर खुले निर्माण कार्य शुरू करने की बात भी उन्होंने कही थी।


