3 लाख सैलरी वाले नहीं पढ़ाते, 57 हजार वाले पर जिम्मा
राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की स्थिति गंभीर होती जा रही है। इसका खुलासा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक सुधीर बाड़ा की ओर से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को भेजे गए पत्र से हुआ है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि स्थाई यूनिवर्सिटी शिक्षक और प्रिंसिपल नियमित रूप से कक्षाएं नहीं ले रहे हैं। पढ़ाई का पूरा भार नीड बेस्ड (एडहॉक) असिस्टेंट प्रोफेसरों पर डाल दिया गया है। निदेशक ने इसे अकादमिक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए सभी विश्वविद्यालयों से स्थाई शिक्षकों, नीड बेस्ड शिक्षकों और प्रिंसिपलों द्वारा प्रतिदिन ली जा रही कक्षाओं की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है साथ ही इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखने का निर्देश दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग को मिली शिकायत के अनुसार अंगीभूत महाविद्यालयों और पीजी विभागों में नियमित शिक्षण कार्य नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर ही कर रहे हैं। ये प्रतिमाह औसतन 64 से अधिक कक्षाएं लेते हैं और इन्हें प्रतिमाह 57,700 रुपए का मानदेय मिलता है। इसके विपरीत स्थाई शिक्षक प्रतिमाह 1 से 3 लाख रुपए तक वेतन उठा रहे हैं, लेकिन न्यूनतम निर्धारित कक्षाएं भी नहीं ले रहे। कई कॉलेजों में प्रिंसिपल तो कक्षा लेना भूल चुके हैं। निदेशक का पत्र मिलते ही एक्शन में विवि प्रशासन उच्च शिक्षा निदेशक का पत्र मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया है। सभी विभागों से शिक्षकों द्वारा ली गई कक्षाओं की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र भेजने को कहा गया है। मामले में एक वरीय शिक्षक ने बताया कि स्थाई शिक्षकों की कक्षा रिपोर्ट तैयार करना आसान नहीं होगा, क्योंकि कई प्रोफेसर व एचओडी ऐसे हैं जो महीने में दो–चार कक्षाएं ही लेते हैं।


