2025 में मप्र में 56 बाघों की मौत हुई है। यह आंकड़ा 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद सर्वाधिक है। इनमें 38 की मौत प्राकृतिक कारणों जैसे टेरिटोरियल फाइट, बीमारी या उम्र के कारण हुई है। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि सर्वाधिक 12 मौतें हादसों के कारण युवा टाइगर्स की हुई हैं। इनमें 10 की मौत अवैध रूप से बिछाए गए बिजली के तारों की चपेट में आने से हुई है। पिछले 10 साल में 39 बाघ, 101 तेंदुए और 36 भालुओं की भी जान करंट के कारण चली गई। वन बल प्रमुख विजय कुमार अंबाड़े का कहना है कि अफसरों को पेट्रोलिंग के निर्देश दिए हैं। कहीं बिजली के तार या फंदे लगे मिलें तो कार्रवाई करें। पीसीसीएफ शुभरंजन सेन ने भी ऊर्जा विभाग को इस संबंध में पत्र लिखा है। अधिकारियों को निर्देश… वनों से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में सघन पेट्रोलिंग करें, ऊर्जा विभाग को भी पत्र लिखा पिछले 1 माह में बाघों की मौत के कारण भास्कर एक्सपर्ट – जसबीर चौहान, पूर्व पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ फसल हानि का मुआवजा नहीं मिलता, इसलिए बिजली के तार बिछा देते हैं
शाकाहारी वन्यजीव खेतों में आते हैं, उनके पीछे टाइगर-तेंदुए पहुंचते हैं और करंट की चपेट में आ जाते हैं। मध्यप्रदेश में फसल नुकसान पर मुआवजा नहीं मिलने से किसान करंट लगाते हैं। नियमों के मुताबिक 25% नुकसान पर ही मुआवजा मिलता है, जबकि वन्यजीव 10% से ज्यादा नुकसान नहीं करते। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र में मुआवजा अधिकार वन विभाग को देने से ऐसे हादसे रुके हैं।


