शिमला में टनल निर्माण से कई घरों को खतरा:आधी रात में खाली कराए मकान, 15 परिवार बेघर, जनता में अक्रोश, काम रोकने पड़े अड़े

हिमाचल की राजधानी शिमला के चलौंठी में नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और टनल बनाने वाली कंपनी के खिलाफ जनता में जबरदस्त आक्रोश है। स्थानीय लोग टनल का काम रुकवाने पर अड़ गए हैं। प्रभावित परिवारों ने टनल बनाने वाली कंपनी पर दुर्व्यवहार के भी आरोप लगाए। पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह खुद मौके पर पहुंचे हैं। दरअसल, संजौली के चलौंठी में बन रही फोरलेन की टनल के ऊपर बने एक होटल और 2 मकानों को आधी रात में खाली करवाया गया। इससे अफरा-तफरी मच गई। होटल में काफी टूरिस्ट भी ठहरे हुए थे। उन्हें भी सड़कों पर आना पड़ा। इसी तरह, 2 मकानों से लगभग 15 परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। देर रात तक लोग सड़क किनारे खड़े रहे। टनल निर्माण की वजह से 4 से 5 घर खतरे की जद में आ गए है। ब्लास्टिंग बंद करने के निर्देश: अनिरुद्ध पंचायतीराज मंत्री ने कहा- वह लंबे समय से यह मामला NHAI और केंद्रीय मंत्री गडकरी से उठा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने जिन भवनों को नुकसान हो रहा है, उसकी पूरी भरपाई करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा- ब्लास्टिंग बंद करने के निर्देश दे दिए गए हैं। घरों में आई बड़ी बड़ी दरारें, बाईपास भी क्षतिग्रस्त टनल निर्माण की वजह से लोगों के घरों में बड़ी बड़ी दरारें आ गई है। यही नहीं मकानों के साथ साथ संजौली-ढली बाईपास में भी दरारें आई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने देर रात ही इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी और मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया। कुछ लोग आसपास में ठहरे तो कुछ परिवारों को किसान भवन और होटल में शिफ्ट किया गया। शिमला में बन रही टनल विवादों में बता दें कि शिमला के भट्टाकुफर से संजौली के चलौंठी तक फोरलेन की टनल का काम चल रहा है। चलौंठी में टनल निर्माण की वजह से कई घर खतरे की जद में आ गए है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 3 दिन पहले दीवारों में हल्की दरारें दिखने लगी थीं। इस बारे में निर्माण कंपनी और जिला प्रशासन को अवगत भी कराया गया था। तब कंपनी कर्मचारियों ने भवन को सुरक्षित बताते हुए किसी बड़े खतरे से इनकार किया था। शुक्रवार शाम को अचानक दरारें तेजी से बढ़ीं, जिसके बाद स्थिति गंभीर हो गई और देर रात मकान खाली करवाने का फैसला लेना पड़ा। रातभर सड़क पर बैठे रहे लोग, नहीं थी कोई व्यवस्था मकान खाली तो करवा दिया गया, लेकिन प्रभावित परिवारों के ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। रात पौने 12 बजे तक महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ढली बाईपास सड़क पर बैठे नजर आए। कुछ लोगों ने ठंड से बचने के लिए सड़क किनारे आग जलाई। हालांकि, SDM शिमला ग्रामीण मंजीत ने दावा किया वह खुद सभी परिवारों को सुरक्षित ठहराने के लिए रात एक बजे तक स्पॉट पर रहे। भट्ठाकुफर हादसे की यादें फिर ताजा चलौंठी से पहले दिसंबर माह में शिमला के भट्ठाकुफर में भी टनल निर्माण की वजह से सड़क पर 15 फीट चौड़ा और 15 फीट गहरा होल बन चुका है। यहां भी कई मकानों में दरारें आई है। बीते मानसून सीजन में एक बहुमंजिला मकान धराशायी भी हो चुका है। उस समय भी फोरलेन निर्माण के लिए की गई गलत कटिंग को हादसे की वजह बताया गया था। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अब तक उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। ​​​​​​ इलाके में दहशत का माहौल चलौंठी क्षेत्र में पहले भी जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब बिना बारिश मकान में दरारें आने से लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। स्थानीय लोगों की मांग है कि टनल निर्माण की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए और उनके घरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यहां देखे टनल निर्माण के बाद उत्पन्न हालात के PHOTOS..

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *